मानवीय मूल्यों का संवर्धन ही नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य – गजेन्द्र यादव
साईंस कालेज दुर्ग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर दो दिवसीय कार्यशाला का समापन
दुर्ग। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का संवर्धन करना है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों का सर्वोगीण विकास करने के उद्देश्य से विद्यार्थियों का कौशल विकास, स्वालंबी बनाना तथा राष्ट्र का एक अच्छा नागरिक बनाने हेतु आवश्यक सभी बिंदुओं का समावेश किया गया है। एक दशक में इसके परिणाम दिखाई देने लगेगें। ये उद्गार छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने व्यक्त किये। मंत्री गजेन्द्र यादव शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दो दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण की दौड़ में हम अपनी ज्ञान पध्दति एवं संस्कृति से दूर होते जा रहे है। भारतीय दर्शन, संस्कार, चिकित्सा पध्दति सभी चीजें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक है।

कार्यक्रम आयोजन समिति के डॉ. ए.के. खान ने बताया कि आज प्रथम सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के सेवा निवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी श्रीमती मोनिका एस. गर्ग ने एन.ई.पी. 2020 के परिपेक्ष्य में ए.आई. का अनुप्रयोग विषय पर रोचक व्याख्यान दिया। डॉ. गर्ग ने बताया कि शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग अथवा दृष्टिबाधित लोगों के लिये भी एआई एक वरदान की तरह है। यह टेक्सट को आवाज में बदल देता है तथा आवाज को टैक्सट में । प्रयागराज कुंभ के दौरान एआई का भरपूर प्रयोग किया गया।

द्वितीय सत्र में शारदा समूह झाबुआ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रौद्योगिक संस्थान, सूरत के जनजाति विकास केन्द्र के सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने एक संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने कहा कि हम भारत को भारत रहने दे तथा हिन्दु पचांग के अनुसार अपना जन्म दिवस मनायें। उन्होंने कि आज हम व्यक्ति को छोड़कर मशीन पर ज्यादा विश्वास करते है।
शिक्षा, संस्कृति, उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने समापन सत्र में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। डॉ. कोठारी के अनुसार व्यक्तित्व विकास एक प्रक्रिया है तथा चरित्र निर्माण उसका परिणाम। श्री कोठारी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को ओम शब्द के उच्चारण का महत्व बताते हुए संक्षिप्त ध्यान कराया। डॉ. कोठारी ने कहा कि शिक्षकों को कक्षाओं में बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से समझाने का प्रयास करना चाहिये तभी बच्चों से संतुष्ट होंगे। श्री कोठारी ने पंचकोष, अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष तथा आनंदमय कोष का विस्तार से विष्लेषण करते हुए कहा कि पांचों कोषों का विकास ही विद्यार्थी का समग्र विकास है।
इससे पूर्व उच्चशिक्षा विभाग छ.ग. शासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आयुक्त उच्चशिक्षा, डॉ. संतोष देवांगन तथा साईंस कालेज, दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने सभी अतिथि वक्ताओं का शॉल, श्रीफल तथा ढोकरा आर्ट से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।
दुर्ग संभाग के आयुक्त, सत्य नारायण राठौर ने कहा कि एनईपी 2020 के माध्यम से विद्यार्थियों को अभ्यास तथा वैराग्य से मन को संतुलित किया जा सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा, समृध्दि एवं साधना का संगम है।
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि जो कक्षा में सिखाया गया , उसमें से कुछ भूल गया और बच गया उसे ग्रहण किया यही शिक्षा है। विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकास राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल बिंदु है। कार्यशाला के दूसरे दिन हेमचंद यादव विश्विवद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन.पी. दीक्षित, रायपुर के अपर संचालक, उच्चशिक्षा डॉ. तपेष चंद्र गुप्ता, बस्तर के अपर संचालक, उच्चशिक्षा डॉ. अनिल कुमार, संयुक्त संचालक, उच्चशिक्षा, रायपुर डॉ. अरूण सिन्हा सहित बड़ी संख्या में प्राचार्यगण, प्राध्यापकगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति धारकर ने किया।
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