यूपी के सराफा दुकानों में बुर्का बैन, घूंघट भी नहीं चलेगा
झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी में ऐसे ग्राहकों को सराफा दुकान में न प्रवेश करने की हिदायत दी है जो या तो बुर्के में हैं या फिर घूंघट निकाले हुए हैं। सराफा व्यापारियों का कहना है कि चेहरा छिपाकर खरीदारी करते समय कुछ भी ऊंच -नीच हो जाने पर सीसीटीवी किसी काम के नहीं रह जाते। आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती। लगातार बढ़ रही चोरी और ठगी को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
झांसी के सीपरी बाजार के सर्राफा व्यापारियों ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए फैसला किया है कि अब नकाब, बुर्का या घूंघट में आए ग्राहकों को ज्वेलरी नहीं बेची जाएगी। पहचान सुनिश्चित करने के लिए दुकानों पर चेतावनी पोस्टर लगाए गए हैं और पुलिस की सहमति भी ली गई है।
यहां ज्वेलरी दुकानों पर अब किसी भी ग्राहक को तब तक प्रवेश नहीं मिलेगा, जब तक वह अपना चेहरा नहीं दिखाता। दुकानदारों ने दुकानों के बाहर स्पष्ट नोटिस लगा दिए हैं कि नकाब या घूंघट में आने वाले लोगों को आभूषण नहीं बेचे जाएंगे।
सीपरी सर्राफा व्यापार मंडल ने हाल के महीनों में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए सामूहिक रूप से यह नियम लागू किया है। व्यापारियों का कहना है कि सोने और चांदी के बढ़ते भाव के साथ आपराधिक घटनाएं भी बढ़ी हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां नकाब पहने लोग वारदात को अंजाम देकर आसानी से भाग निकलते हैं और सीसीटीवी फुटेज में उनकी पहचान मुश्किल हो जाती है।
व्यापारियों ने पुलिस की सहमति से दुकानों के बाहर और अंदर चेतावनी वाले पोस्टर लगा दिए हैं। इन पोस्टरों में साफ लिखा है कि नकाबपोश ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा और खरीदारी से पहले पहचान सुनिश्चित की जाएगी। व्यापार मंडल के अध्यक्ष उदय सोनी के अनुसार यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है ताकि ज्वेलरी बाजार सुरक्षित रह सके और अपराध पर लगाम लगे।
महिला ज्वेलर ममता ने बताया कि ग्राहकों को जागरूक करने के लिए दुकानों पर लगातार सलाह दी जा रही है कि वे बिना चेहरा दिखाए खरीदारी करने की कोशिश न करें। उनका कहना है कि कई बार नकाब की आड़ में गंभीर वारदातें होती हैं और बाद में जांच में आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती। इसी कारण व्यापारियों ने सख्त रुख अपनाया है और अब बिना पहचान की पुष्टि के कोई लेनदेन नहीं किया जाएगा।
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