सही साइकिल पॉलिसी बनाकर कम किया जा सकता है प्रदूषण
नई दिल्ली। साइकल के लिए सही पॉलिसी बनाकर ग्लोबल साउथ (विकासशील देश) उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है। भारत, बांग्लादेश और घाना के चार शहरों में साइकल चलाने वालों से फीडबैक लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और IIT दिल्ली के वैज्ञानिकों ने यह स्टडी की है। स्टडी के अनुसार विकसित देशों में जहां साइकिल चलाना आम बात है वहीं यहां विकासशील देशों में इसे लेकर लोग सहज नहीं हैं।
इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि दिल्ली में यूरोप और विकसित देशों की तर्ज पर साइकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है जो कि दिल्ली की स्थिति में फिट नहीं होता। पॉलिसी मेकर्स को लोगों की जरूरत को समझते हुए प्लान करना चाहिए। IIT दिल्ली के असिस्टेंट प्रफेसर राहुल गोयल ने कहा, साइकल चलाने वालों की कमी नहीं है। संस्थागत समर्थन की कमी है।
अमीर देशों में साइकल चलाना बहुत आम
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अमीर देशों में साइकल चलाना बहुत आम होता जा रहा है। स्वास्थ्य लाभ और पर्यावरण पर प्रभाव को देखते हुए इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन यह नीतियां गरीब देशों में काम नहीं करती। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागों बायोलॉजिकल साइंस डिविजन के असोसिएट प्राफेसर कवि भल्ला के मुताबिक गरीब और मध्यम आय वाले देशों में ट्रांसपोर्ट से होने वाले प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को साइकल से कम किए जाने की काफी संभावनाएं है।
ग्लोबल साउथ के देशों में सफल नहीं होगी ये नीतियां
संयुक्त राज्य अमेरिका या यूरोप के शहरों में साइकल चलाने को बढ़ावा देने में कारगर साबित होने वाली नीतियां ग्लोबल साउथ के देशों में सफल नहीं होगी। रिपोर्ट में एक तरह के आय, घनी आबादी और समस्याओं वाले देशों के 4 शहर शामिल हैं। दिल्ली और चैन्ने, ढाका और अकरा (घाना) शामिल हैं।
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