हाईकोर्ट की यह बात मान ली तो बलात्कार के आधे मामले खत्म
पटना। दो वयस्कों के बीच प्रेम होता है, शारीरिक संबंध बनते हैं। फिर युवती शादी के लिए दबाव बनाती है और किसी कारण से युवक शादी से इंकार कर देता है या अपनी असमर्थता जताता है। इसके बाद युवती पुलिस में शिकायत दर्ज करा देती है कि उसे शादी का झांसा देकर उसके साथ बलात्कार किया गया। पर अब पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि यह झांसा देकर बलात्कार करना नहीं कहा जा सकता।
पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने शादी के वादे के नाम पर दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अभियोजन को रद कर दिया है। न्यायाधीश सोनी श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज मुकदमे को निराधार और प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया।
मामला भागलपुर जिले के जगदीशपुर थाना कांड संख्या 121/2019 से संबंधित था, जिसमें आरोप था कि अभियुक्त ने विवाह का झांसा देकर लगभग एक वर्ष तक शारीरिक संबंध बनाए। अभियुक्त की ओर से दलील दी गई कि दोनों बालिग थे और संबंध सहमति से थे। पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य सामग्री से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रारंभ से ही विवाह का कोई झूठा वादा किया गया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि झूठा वादा और विवाह का न हो पाना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। यदि परिस्थितिवश विवाह नहीं हो सका, तो मात्र इसी आधार पर दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सहमति से बने संबंधों के विफल हो जाने पर उन्हें आपराधिक रंग देना स्वीकार्य नहीं है।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 376 के आवश्यक तत्व इस मामले में प्रथम दृष्टया अनुपस्थित हैं। परिणामस्वरूप, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज करने का आदेश रद करते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
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