अपोलो हॉस्पिटल में बिना चीरा के लगाया गया लीडलैस पेसमेकर

अपोलो हॉस्पिटल में बिना चीरा के लगाया गया लीडलैस पेसमेकर

बिलासपुर। यहां के अपोलो हॉस्पिटल में एक मरीज के दिल में ‘AVEIR’ नामक पेसमेकर का इम्प्लांट किया गया। सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के लिए न तो सर्जरी की जरूरत पड़ी और न ही शरीर पर किसी तरह का चीरा लगाया गया। लीडलैस पेसमेकर पारंपरिक पेसमेकर से अधिक छोटा और सुरक्षित है।

इस पेसमेकर की बैटरी की लाइफ लगभग 20 साल होती है और इसमें संक्रमण का खतरा नहीं होता। यह लीडलैस पेसमेकर AAA बैटरी से भी छोटा है, पारंपरिक पेसमेकर में छाती पर चीरा लगाना पड़ता है और त्वचा के नीचे बड़े डिवाइस को फिट करना होता है।

लीडलैस पेसमेकर में इन परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। इस तकनीक के जरिए मरीज का दिल सामान्य तरीके से धड़कता है। इसके अलावा, इसकी बैटरी की लाइफ भी पारंपरिक पेसमेकर से जयादा होता है और बैटरी ख़त्म होने के बाद इसे आसानी से बदला भी जा सकता है जो इसे बेहद प्रभावी बनाती है।

अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. एम.पी.सामल ने बताया ‘पेसमेकर उन मरीजों के लिए होता है जिनके दिल की गति धीमी हो जाती है। पारंपरिक पेसमेकर तार वाले होते हैं, जिनमें एक या दो तार हो सकते हैं लेकिन यह नया पेसमेकर तार रहित है, जिसे हम ‘लीडलेस पेसमेकर’ कहते हैं।

डॉ. सामल ने बताया कि यह पेसमेकर लगाने से मरीज के जीवन में काफी बदलाव आता है। सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें ऑपरेशन का कोई निशान (सर्जिकल स्कार) नहीं होता। इसके अलावा, इस पेसमेकर को बीच में अपग्रेड भी किया जा सकता है। अगर आवश्यकता हो। इस तरह का तार रहित पेसमेकर, जिसे ‘लीडलेस पेसमेकर’ कहा जाता है, मरीजों के लिए कई फायदे लेकर आता है।

डॉ. एम.पी. सामल ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमने छत्तीसगढ़ में पहली बार इस आधुनिक तकनीक का उपयोग किया है। एबॉट का AVEIR लीडलेस पेसमेकर मरीजों के लिए एक बड़ी सौगात है, और हम भविष्य में भी ऐसी ही उपलब्धियां हासिल करते रहेंगे। लीडलेस पेसमेकर के इम्प्लांटेशन के कुछ ही घंटों के भीतर मरीज चलने-फिरने लगा, जिससे यह तकनीक दिल के मरीजों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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