पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं सांसद विजय बघेल ने सौंपा विस्तृत ज्ञापन

इस्पात मंत्री के समक्ष उठाया बीएसपी लीज-रिटेंशन पॉलिसी का मामला

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं सांसद विजय बघेल ने सौंपा विस्तृत ज्ञापन

भिलाई । छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय एवं सांसद विजय बघेल ने भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों एवं टाउनशिप के मुद्दे को जोरशोर से उठाया है। दोनों नेताओं ने दिल्ली में केन्द्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात कर बेबाकी से अपनी बात रखी। दोनों नेताओं ने रिटेंशन स्कीम के तहत टाउनशिप के आवासों के किराए में की गई बेतहाशा वृद्धि की तरफ इस्पात मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

श्री पाण्डेय ने इस्पात मंत्री को बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित टाउनशिप भी है। वर्षों से यहाँ कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी, व्यापारी और विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोग अपने परिवारों के साथ निवास करते आए हैं। हाल ही में संयंत्र प्रबंधन ने किराया और लीज प्रीमियम और आवास नीति में अत्यधिक वृद्धि कर दी है जिससे नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 से लागू रिटेंशन स्कीम योजना के अंतर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूर्व निर्धारित दरों पर आवास उपलब्ध कराया जाता था। यदि निर्धारित अवधि के बाद आवास खाली नहीं किया जाता, तो 32 गुना किराया वसूला जाता था। लेकिन नवंबर 2025 से इस व्यवस्था को समाप्त कर सीधे ₹24 प्रति वर्गफुट की दर लागू कर दी गई। इसके चलते 700 वर्गफुट के क्वार्टर में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब ₹15,000 से ₹17,000 तक मासिक किराया देना पड़ रहा है। यह न केवल अव्यावहारिक बल्कि अन्यायपूर्ण है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को क्वार्टर उपलब्ध कराने के विषय में उन्होंने बताया कि वर्तमान में सेवानिवृत्त कर्मियों को अधिकतम 450 वर्गफुट तक के क्वार्टर ही लाइसेंस पर दिए जा रहे हैं, जबकि अन्य इस्पात संयंत्रों में 650 वर्गफुट तक के क्वार्टर उपलब्ध कराए जाते हैं। यही सुविधा भिलाई में भी दी जानी चाहिए। पहले ट्यूबलर शेड और 24 यूनिट जैसे छोटे क्वार्टर मात्र ₹5,000 की राशि पर लाइसेंस पर दिए जाते थे। अब इनका नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इन क्वार्टरों के लिए लाइसेंस योजना पुनः लागू की जाए।

इसके अतिरिक्त टाउनशिप में बैंक, डाक विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग जैसे संस्थानों के कर्मचारियों को भी बीएसपी द्वारा आवास किराए पर दिए जाते रहे हैं। पहले इनका किराया ₹5 प्रति वर्गफुट था, लेकिन नवंबर में एकाएक 60 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई। इससे इन संस्थानों के कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ आ गया है। सामान्य किराया अधिनियमों के अनुसार प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि उचित नहीं मानी जाती, लेकिन बीएसपी प्रबंधन ने सार्वजनिक परिसंपत्ति अधिनियम का सहारा लेकर मनमानी वृद्धि की है। उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

श्री पाण्डेय ने बताया कि टाउनशिप में वर्षों पहले दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराए पर दिया गया था। 1991 में इन्हें लीज पर देते समय स्पष्ट किया गया था कि लीज प्रीमियम एक बार तय होगा और केवल लीज रेंट में प्रतिवर्ष वृद्धि होगी। लेकिन अब नवीनीकरण से पूर्व ही लीज प्रीमियम में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े संस्थानों तक पर भारी बोझ पड़ा है। इसे अनुचित बताते हुए प्रीमियम और किराए का पुनर्निर्धारण करने की मांग की गई है।

श्री पाण्डेय ने बताया कि कई क्षेत्रों में मकान तोड़ दिए गए हैं और भूमि खाली पड़ी है। कैंप और खुर्सीपार जैसे क्षेत्रों में भी अनेक भू-खंड रिक्त हैं। इन भूमियों का उपयोग नगर निगम या राज्य शासन द्वारा जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है। वर्ष 2017 में इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा गया था। इन भूमियों को सार्वजनिक उपयोग हेतु राज्य शासन को सौंप दिया जाना चाहिए।

श्री पाण्डेय ने कहा कि कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों, नागरिकों और व्यापारियों में असंतोष बढ़ेगा। इसलिए तत्काल हस्तक्षेप कर स्थानीय प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दें, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके और टाउनशिप में शांति और विश्वास कायम रहे। जिस पर इस्पातमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिये हैं।

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