कथक से कैंसर को मात, चलता रहा इलाज वह करती रही स्टेज शो
फरीदाबाद। यह कहानी है एक ऐसी डांस टीचर की जिसने अपनी जिजीविषा से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को मात दे दी। कैंसर की सर्जरी हुई, कीमो थेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी चलती रही पर उसने कथक का मंच नहीं छोड़ा। इलाज के दौरान भी न केवल वह मंचीय प्रस्तुतियां देती रहीं बल्कि स्कूल में डांस टीचर की अपनी जिम्मेदारी का भी पूरी संजीदगी केसाथ निर्वाह किया।
प्रोमा मुखर्जी (Proma Mukherjee) फरीदाबाद के ग्रीन फिल्ड में रहती हैं और पाथवेज स्कूल गुड़गांव में पिछले 9 साल से डांस टीचर हैं। उनका लगभग दो दशक का पेशेवर कथक डांसर का करियर रहा है। मार्च 2025 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कैंसर डे पर मीडिया से बात करते हुए परोमा ने बताया कि वह बिल्कुल ठीक थी। कोई लक्षण नहीं थे। एक दिन मॉइस्चराइजर लगाते समय स्तन में एक गांठ महसूस हुई। वे स्क्रीनिंग के लिए गई। स्टेज 2 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला।
पहले कैंसर की सर्जरी हुई। फिर कीमो चला। कीमो के बाद उनके बाल झड़ने लगे। 8 कीमोथेरेपी चकों के बीच भी उन्होंने गुड़गांव में अपने शो जारी रखे। सर्जरी के दो हफ्ते बाद ही उनका एक शो था। उनका हाथ नहीं उठ पा रहा था। फिजियोथेरेपी की मदद से उन्होंने फिर से मंच संभाला। उन्होंने इस दौरान कुल 12 स्टेज शो किए।
कैंसर मुक्त किया घोषित
डॉ, अमित उपाध्याय ने प्रोमा के इलाज को उनके करियर और भविष्य की जरूरत के हिसाब से तैयार किया। जहां एक और ओवेरियन प्रोटेक्टिंग इंजेक्शन से उनकी फर्टिलिटी को सुरक्षित रखा गया, वहीं दूसरे और ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी से उनके आत्मविश्वास को बनाए रखा। जनवरी 2026 में प्रोमा मुखर्जी को कैंसर मुक्त घोषित कर दिया गया।
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