क्या ओडीशा में प्रकट होंगे “कल्किअवतार”, क्या है तलवार का रहस्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के दसवें अवतार ‘कल्कि’ (Kalki Avatar) कलयुग के अंत में प्रकट होंगे। पर वे कहां प्रकट होंगे, उनका स्वरूप कैसा होगा, इसे लेकर तरह तरह की धारणाएं जनमानस को आंदोलित करती रहती हैं। मा्न्यता है कि कल्कि अवतार का अवतरण ओड़ीशा की पावन धरती पर होगा जहां उनकी तलवार आज भी संरक्षित है। इस तलवार का आकोर लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल यह तलवार 12 फीट की है।

पौराणिक मान्यताओं तथा यहां के मठों में संरक्षित दस्तावेजों के अनुसार कल्कि के पास ‘नंदक’ नाम की दिव्य तलवार होगी। ओडिशा के छतिया पट धाम में एक प्राचीन प्रतिमा के पास 12 हाथ (लगभग 12-18 फीट) लंबी तलवार होने का दावा किया जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि जब यह तलवार पूरी तरह से बाहर आएगी, तब कल्कि का जन्म होगा।
छतिया बाट (छतिया मार्ग) कटक और जाजपुर के बीच कटक-चंडीखोल राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित है। जाजपुर शहर से 48 किलोमीटर दूर स्थित छटिया के सुरम्य गांव में एक अद्वितीय मंदिर स्थित है – छटिया बाट मंदिर। वैष्णव धर्म और हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक भगवान जगन्नाथ से इसका जुड़ाव इसे आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बनाता है। इसकी विशिष्टता यह है कि यह उन कुछ मंदिरों में से एक है जो भगवान विष्णु के दसवें अवतार ‘कल्कि’ को समर्पित हैं।
कल्कि अवतार और उनकी तलवार से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं:
कल्कि अवतार को सफेद घोड़े (देवदत्त) पर सवार और बिजली जैसी चमकती हुई दिव्य तलवार (अग्निमय तलवार) के साथ चित्रित किया जाता है। छतिया पट धाम में कल्कि अवतार की तलवार मौजूद है। कहा जाता है कि हर साल यह तलवार थोड़ी बढ़ती है और जब यह पूर्ण आकार (12 हाथ/फीट) ले लेगी, तब कल्कि का अवतरण होगा। कल्कि का जन्म संभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर होगा। इस अवतार का उद्देश्य कलयुग का अंत करके, अधर्मियों और पापियों का विनाश करना तथा पुनः सत्ययुग (सतयुग) की स्थापना करना है। मान्यता यह भी है कि परशुराम जी कल्कि के गुरु होंगे, जो उन्हें भगवान शिव द्वारा प्रदान की गई तलवार चलाने की शिक्षा देंगे।
कुछ मतों के अनुसार, यह तलवार (12 फीट की) प्रतीकात्मक है, जो धर्म की सर्वोच्चता और पाप के अंत की गति को दर्शाती है।
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