क्या है "चराईदेव मोइदम्स", यूनेस्को विश्व धरोहर में किया गया शामिल

क्या है “चराईदेव मोइदम्स”, यूनेस्को विश्व धरोहर में किया गया शामिल

गुवाहाटी। यूनेस्को ने असम में अहोम राजवंश के ‘चराईदेव मोइदम्स’ (Charaideo Moidams) को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया। विश्व धरोहर समिति के नई दिल्ली में आयोजित 46वें सत्र में इसे यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल करने करने का फैसला किया गया। भारत सरकार पिछले 10 साल से इसे विरासत सूची में शामिल करने का प्रयास कर रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मोइदम्स’ के विश्व विरासत घोषित होने पर खुशी जताई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा ने इस उपलब्धि के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत का आभार जताया है। ‘मोइदम्स’ नॉर्थ ईस्ट भारत की पहली सांस्कृतिक संपत्ति है, जिसे यूनेस्को की विरासत सूची में जगह मिली है। ‘मोइदम्स’ असम के अहोम राजवंश की परंपरा से जुड़ा है, जिसने असम में लगभग 600 साल तक शासन किया था। ‘चराइदेव मोइदम्स’ एक टीलेनुमा संरचना है, जिसमें अहोम वंश से जुड़े लोगों को उनके प्रिय सामानों को दफनाया जाता था। ‘मोइदम्स’ का इतिहास करीब 600 साल पुराना बताया जाता है। वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 168 देशों की 1,199 संपत्तियां शामिल हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा ने कहा कि यह असम के लिए बहुत अच्छी खबर है, क्योंकि ‘चराइदेव मोइदम्स’ अब आधिकारिक तौर पर यूनेस्को विरासत स्थल है।असम इस सम्मान के लिए हमेशा केंद्र का ऋणी रहेगा। यह कदम केवल असम के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए सम्मान का विषय है। नियम के अनुसार, विश्व धरोहर समिति एक देश से सिर्फ एक प्रविष्टि पर विचार करता है। इस बार केंद्र सरकार ने असम ‘चराइदेव मोइदम्स’ (Charaideo Moidams) को चुना था। असम सरकार ने 2023 में प्रधानमंत्री को इस बाबत एक डोजियर सौंपा था।

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