छापे में मिलीं 5 किशोरियों सहित 11 लड़कियां, एक थी आलमारी में बंद

छापे में मिलीं 5 किशोरियों सहित 11 लड़कियां, एक थी आलमारी में बंद

नई दिल्ली। दक्षिण पश्चिम दिल्ली के द्वारका स्थित एक वेश्यावृत्ति अड्डे पर छापामारी के दौरान पुलिस को 11 लड़कियां संदिग्ध हालात में मिलीं। इनमें से कम से कम 5 लड़कियां नाबालिग या किशोरियां हैं। ऊंचे दामों के चलते दलाल इन लड़कियों का फंसा कर लाते ही हैं, कुछ लड़िकयां हाई फाई लाइफ स्टाइल की लालत में खुद ही इस दलदल की ओर आकर्षित होती हैं।

दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिले की डाबड़ी पुलिस ने द्वारका में एक वेश्यावृत्ति के अड्डे पर छापे की कार्रवाई की थी। पुलिस ने यह कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन से मिली पुख्ता जानकारियों के बाद की जिसके सदस्यों ने फर्जी ग्राहक बनकर इस गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई। इन लड़कियों को ट्रैफिकिंग के जरिए पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश से लाया गया था। पुलिस ने छापे में आठ ग्राहकों और मौके से दो अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

छापेमारी के दौरान पुलिस स्तब्ध रह गई जब एक लड़की बदहवास हालत में आलमारी में बंद मिली। मौके से कंडोम के पैकेट और सात कुत्ते भी मिले। एफआईआर के अनुसार, इन सभी को बंधुआ हालत में कैद करके रखा गया था और उन्हें कहीं भी मर्जी से जाने की इजाजत नहीं थी। वेश्यावृत्ति का यह अड्डा जिस घर से चल रहा था, वह चारों तरफ से बंद था और कुत्तों को शायद इसलिए रखा गया था कि कोई यहां से भाग नहीं पाए।

छापेमारी के दौरान आलमारी से मिली लड़की बदहवास हालत में थी और डर के मारे कांप रही थी। काउंसलिंग के दौरान लड़कियों ने बताया कि उन्हें डरा धमका कर व लगातार कड़ी निगरानी में रखा जाता था और किसी को भी घर से बाहर कदम रखने की इजाजत नहीं थी।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, यह प्रकरण मौजूदा हालात की गंभीरता की ओर इशारा करता है। बच्चों को पड़ोसी राज्यों से बहला फुसला कर ट्रैफिकिंग के जरिए लाया जाता है और उन्हें अमानवीय स्थितियों में धकेल दिया जाता है।
एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन ट्रैफिकिंग व शोषण के अन्य स्वरूपों से बच्चों की सुरक्षा के लिए देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में काम कर रहे हैं।
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