त्रेता में माता सीता ने रेत से किया था राजिम में शिवलिंग का निर्माण
राजिम। त्रिवेणी संगम तट पर स्थित पंचमुखी भगवान श्री कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण राम वनगमन पथ से होते हुए राजिम पहुंचे थे।जहां त्रिवेणी संगम में स्नान के पश्चात माता सीता ने नदी में रेत से शिवलिंग बना कर पूजा-अर्चना की। यह प्राचीन मंदिर आठवीं-नवमी शताब्दी का बताया जाता है।

मंदिर में की गई कलात्मक नक्काशी और स्थापत्य कला यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करती है। मंदिर परिसर दो प्रमुख भागों में विभाजित है। प्रथम भाग में महामंडप से होते हुए गर्भगृह स्थित है, जहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं। वहीं दूसरे भाग में देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में स्थित पीपल का वृक्ष लगभग 600 वर्ष पुराना बताया जाता है। यह मंदिर लगभग 17 फीट ऊंचे जगती तल पर स्थित है। प्रतिवर्ष बरसात के दिनों में बाढ़ आने के बावजूद मंदिर अपने स्थान पर अडिग खड़ा है। मंदिर अभिलेखों के अनुसार यह लगभग 1100 वर्षों से अपने मूल स्थान पर स्थित है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन दिशाओं से सीढ़ियां बनाई गई हैं। मुख्य सीढ़ी पूर्व दिशा की ओर है, जबकि अन्य दो सीढ़ियां उत्तर और दक्षिण दिशा में स्थित हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण राम वनगमन पथ से होते हुए राजिम पहुंचे थे।जहां त्रिवेणी संगम में स्नान के पश्चात माता सीता ने नदी में रेत से शिवलिंग बना कर पूजा-अर्चना की। कथा के अनुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय पांच दिशाओं से जल प्रवाहित होने लगा, जिससे यह शिवलिंग पंचमुखी स्वरूप में प्रतिष्ठित हुआ। तभी से यह स्थल पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पृथ्वी लोक में द्वादश ज्योतिर्लिंग, 275 पवित्र शैव पीठ एवं 108 दिव्य शिवलिंगों का उल्लेख मिलता है। राजिम क्षेत्र में भी अनेक प्राचीन शिवलिंग स्थापित हैं, जिनमें भूतेश्वरनाथ महादेव, राजराजेश्वर नाथ महादेव, दानेश्वरनाथ महादेव, पंचेश्वरनाथ महादेव, बाबा गरीबनाथ महादेव, सोमेश्वरनाथ महादेव, भुनेश्वरनाथ महादेव, पद्मेश्वरनाथ महादेव एवं बटुकेश्वरनाथ महादेव प्रमुख हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी, जबकि माता सीता ने राजिम के त्रिवेणी संगम में रेत से कुलेश्वरनाथ महादेव की स्थापना की थी। यहां शिवलिंग का प्रतिदिन श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में लिंग रूप में भगवान शिव तथा नीचे वेदी रूप में माता पार्वती विराजमान हैं।
आज भी निभाई जाती है परंपरा
पर्व और विशेष अवसरों पर श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर रेत से शिवलिंग का निर्माण करते हैं तथा जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
प्रतिदिन उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दूर-दूर से आए भक्त कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। श्रद्धालु भगवान शिव को बिल्व पत्र, धतूरा, शमी पत्र, शक्कर, दूध, दही, शहद, मधुरस एवं चंदन अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में बैरिकेड लगाए गए हैं, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
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