दुर्गावती टाइगर रिजर्व में साथ रहेंगे बाघ, तेंदुआ औरअफ्रीकी चीता
सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत तैयारियां चल रही हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मुख्य रूप से सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। यह मध्य प्रदेश का 7वां और भारत का 54वां टाइगर रिजर्व है, जिसे नौरादेही और दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बनाया गया है। यह एक प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है जो लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो यहां अप्रैल-मई में चीतों को बसाया जाएगा। चीतों के रहवास को ध्यान में रखकर बोमा (बाड़े) तैयार किए जा रहे हैं। देश का यह पहला अभयारण्य और टाइगर रिजर्व होगा जहां बिग कैट फैमिली के तीन सदस्य टाइगर-तेंदुआ और चीता एक साथ रहेंगे। यहां लगभग 28 बाघ और 50 से अधिक तेंदुए हैं।
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि चीते की रफ्तार भले ही बाघ और तेंदुओं से अधिक हो, लेकिन वो इनका सामना नहीं करते। जब भी कभी सामना होता है तो टाइगर-लेपर्ड भारी पड़ते हैं। कूनो में इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के लिए यह रिसर्च का विषय भी है कि जब इनका सामना होगा तो इन बिग कैट का एक-दूसरे के प्रति क्या रिएक्शन होगा।
नौरादेही प्रबंधन के अनुसार टाइगर रिजर्व का एरिया काफी बड़ा है। इसमें चीतों को सुरक्षित रखने के लिए दक्षिण अफ्रीका की तकनीक पर विशेष रूप से सुरक्षित क्वारेंटाइन बोमा (बाड़ा) बनाए जा रहे हैं। इनको फेंसिंग से कवर किया जाएगा। झटका तकनीक सिस्टम भी लगाया जाएगा। बाकायदा सोलर सिस्टम भी लगाया जा रहा है।
बता दें कि नौरादेही का कुल एरिया 2400 वर्ग किलोमीटर के आसपास है। प्रदेश में यह सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां पर करीब एक दशक पहले से चीतों के लिए लंबे—चौड़े घास के मैदान तैयार किए गए थे। यह पहला अभयारण्य था, जिसे चीतों को बसाने के लिए फाइनल किया गया था, हालांकि बाद में सरकार ने कूनों को चुना था। लेकिन बुंदेलखंड में अब चीतों के आने का सपना जल्द साकार होने जा रहा है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनने के पहले ही नौरादेही में साल 2018 में बाघों का पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट लागू किया गया था। यहां बाघ किशन और बाघिन राधा को बसाया गया था। यहां बड़ी तेजी से इनकी संख्या में इजाफा हुआ और वर्तमान में 28 के आसपास टाइगर फैमिली जिसमें बाघ—बाघिन और शावक मौजूद हैं। वहीं यह हमेशा से तेंदुओं का प्राकृतिक आवास रहा है। अघोषित रूप से करीब 50 के आसपास तेंदुए बताए जाते हैंं। इसी कारण सवाल उठ रहा है कि, चीतों पर भारी पड़ने वाले बिग कैट के सामने चीते कैसे सुरक्षित रहेंगे?
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