पर्यावरण स्थिरता के लिए अत्याधुनिक सामग्री पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

पर्यावरण स्थिरता के लिए अत्याधुनिक सामग्री पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में पर्यावरण स्थिरता के लिए अत्याधुनिक सामग्री विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ 24 फरवरी को हुआ। उद्घाटन सत्र में संयोजक डाॅ. सुनीता बी. मैथ्यू ने सर्वप्रथम सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देष्यों को बताया।
इस संगोष्ठी के संरक्षक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि मटेरियल साईंस आज के समय की एक सटीक मांग है, जिसके द्वारा अपने वातावरण को सुरक्षित रखते हुए भविष्य के मटेरियल्स की पहचान कर सकते है।
विशिष्ट अतिथि डाॅ. एन.बी. सिंह शारदा विश्वविद्यालय, नोयडा ने अपने कीनोट उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् विकास में नैनो मटेरियल्स की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि सुरेन्द्र प्रसाद ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित की गयी है, जहां मटेरियल्स साईंस आधारित नवाचार की वैश्विक मांग है।
मुख्य अतिथि डाॅ. राजीव प्रकाश, निदेशक, भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा देश ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से सेल्फ सस्टेंड देश है तथा हमें विकास के लिए वेस्ट टू वेल्थ की दिशा में नवाचार करने की आवश्यकता है। इसके लिए नये-नये मटेरियल्स की खोज करना एवं विभिन्न कार्यों में एक ही मटेरियल के उपयोग के क्षेत्र में नवाचार आज की वैश्विक मांग है। यह आवश्यक है, कि इस कार्य में हर क्षेत्र के वैज्ञानिकों के भूमिका होनी चाहिए एवं एक समावेशित प्रयास ही हमें सफल बना सकता है।
उद्घाटन समारोह में डाॅ. अजय कुमार पिल्लई ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस कार्यक्रम में डाॅ. अनुपमा अस्थाना, अपर संचालक, उच्चशिक्षा दुर्ग संभाग, डाॅ. अलका तिवारी, पूर्व प्राध्यापक, डाॅ. जगजीत कौर सलूजा, संयोजक, स्वशासी प्रकोष्ठ, रसायन शास्त्र विभाग के सभी सदस्य, सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, सभी फैकल्टी मेेंबर्स एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. शालिनी पाण्डेय एवं डाॅ. राधाकृष्णन ने किया।

इस संगोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र में डाॅ. सुरेन्द्र प्रसाद, यूएसपी फिजि ने साउथ पेसिफिक विष्वविद्यालय के ग्लोबल रैकिंग एवं अनुसंधान संरचनाओं के बारे में जानकारी दी एवं बताया कि पर्यावरण स्थिरता, संरक्षण एवं मेटल ऑयन के निष्कर्षण में पदार्थ विज्ञान एवं नैनो टेक्नोलाॅजी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सत्र के द्वितीय आमंत्रित वक्ता डाॅ. विजय तांगड़े आरटीएम विश्वविद्यालय, नागपुर ने ग्रीन डीप यूटेक्टिक विलायक पर जानकारी देते हुए बताया कि मेटल आर्गेनिक फ्रेमवर्क सिन्थेसिस में इसे एक सस्टेनेबल सॉल्वेंट के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके पश्चात् विभिन्न प्रातों से आये प्रतिभागियों ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के द्वितीय तकनीकी सत्र में डाॅ. संतोष कुमार वर्मा युलिन युनिवर्सिटी, चीन ने ग्रीन फ्यूल के रूप में हाइड्रोजन एवं उसके व्युत्पन रसायनों को ग्रीन फ्यूल के रूप में भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला इसके पश्चात् के.एन.एम. नागपुर के डाॅ. डब्ल्यू.बी. गुरनूले ने एसबीआर-नैनोकम्पोजिट इलास्टिमर रिंग की विशेषताओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इसके पश्चात् इस सत्र में विभिन्न शोधार्धियों द्वारा शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
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