राजिम कुंभ कल्प में शतायु रामकली बनी आकर्षण का केन्द्र

राजिम कुंभ कल्प में शतायु रामकली बनी आकर्षण का केन्द्र

गरियाबंद। आस्था और भक्ति के मेले में अकसर कुछ ऐसा हो जाता है जो मेले से इतर भी शोहरत की बुलंदियों का साथ जा पहुंचता है। प्रयागराज के मेले में माला बेचने आई मोनालिसा ने तो इतिहास ही रच दिया था। कुछ ऐसा ही दृश्य है इन दिनों राजिम कुंभ कल्प मेला का। शतायु रामकली अपनी लंबी जटाजूट लिए लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।
बेलटुकरी गांव की 100 वर्षीय रामकली के सिर पर 6 फीट से अधिक लंबी जटाजूट है। बचपन से जटा धारण करने वाली रामकली इसे भोलेनाथ का प्रसाद मानती हैं। बचपन में लोग उन्हें कभी कभी भोलेनाथ कहकर भी बुलाया करते थे। फिर कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने शिवजी की भक्ति को ही अपना जीवन बना लिया।

रामकली को ऐतिहासिक राजीव लोचन मंदिर के आसपास देखा जा सकता है। रामकली ने बताया कि वह बचपन से ही जटाजूट धारण कर रही हैं और इसे उन्होंने हमेशा उसी अवस्था में रखा है, जैसा कि ईश्वर ने उनके लिए तय किया. लंबी जटाजूट के वजन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इसे भगवान का प्रसाद मानकर ही धारण किया है. उनके इस सरल और श्रद्धालु भाव को देखकर हर कोई प्रभावित हो गया.

इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए पंडाल में मौजूद लोग अपनी आंखें रोक नहीं पा रहे थे. उनकी जटाजूट और सौम्य व्यक्तित्व के कारण रामकली अब राजिम कुंभ मेला का एक प्रमुख आकर्षण बन चुकी हैं. स्थानीय लोग और श्रद्धालु उनकी लंबी उम्र और जटाजूट के प्रति उनके समर्पण की खूब सराहना कर रहे हैं.

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