राष्ट्रीय महिला दिवस पर देहदान का संकल्प, हुआ अभिनंदन

राष्ट्रीय महिला दिवस पर देहदान का संकल्प, हुआ अभिनंदन

भिलाई। राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सर्वधर्म सेवा संस्था द्वारा भिलाई निवास, कॉफी हॉउस में आयोजित सम्मान समारोह संपन्न हुआ। पुलवामा के वीर शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनसमूह ने राष्ट्र के प्रति अपनी एकजुटता और कृतज्ञता प्रकट की।
इंद्रजीत सिंह के मुख्य आतिथ्य थे। वहीं शपथ फाउंडेशन के वीरेंद्र सतपथी, अधिवक्ता  शहाना कुरैशी, निधी चंद्राकर, डॉक्टर श्री उदय ( CMO, सेक्टर 9 हॉस्पिटल) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का संचालन ज्योति शर्मा, प्रतीक भोई ने किया। घनश्याम पांडे ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अंगदान- देहदान का संकल्प करने वाले महादानियों का अभिनंदन किया गया। 25 महिलाओं जिनमें योगिता पाटिल, रेणुका चौधरी , पूनम महतो, शारदा साहू, देवप्रभा साहू, वंदना पाटनकर, शोभा नानाजी मेश्राम, अरुणा झरबड़े, साधना मौर्य, निधिचंद्राकर, श्रद्धा,अरुणा शर्मा, ज्योति शर्मा, जया सरनाइक, कुसुम खांडवे, के शारदा, आशा रुद्रा, सुष्मिता चक्रवरती, सुधा शर्मा, अलका दास एवं 16 पुरुषों में जिनमें धीरज पाटिल, शोभन कांत चौधरी, अशोक कुमार महतो, पूर्वेश कुमार देवांगन, सत्यम भवानी, सुनील भनोट, चंद्र विजय साहू, नीरज साहू, अनिल कुमार तिवारी, डोमार सिंह साहू, मनीष कुमार साहू, दीपक रंजन दास, नानाजी जगन मेश्राम, प्रभाकर झरबड़े, राजीव कुमार सिंह, ह्रदयानन्द साहू, जीवन राम आदि महा दानवीरों का सम्मान किया गया।
भारत में अंगदान की दर अभी भी लगभग 0.5–1 प्रति मिलियन आबादी के आसपास है, जो कि स्पेन, अमेरिका जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है। देश में प्रतिवर्ष लाखों मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं, किंतु जागरूकता और सामाजिक संकोच के कारण दान की संख्या अपेक्षाकृत कम व अंगों के समय में न मिलने पर मृत्यु दर ज्यादा है।
देहदान भी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए अत्यंत आवश्यक है, किंतु इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है।
महिलाएँ सदैव त्याग, करुणा और सेवा की प्रतिमूर्ति रही हैं। आज सम्मानित मातृशक्तियों ने यह संदेश दिया कि नारी केवल जीवन देने वाली ही नहीं, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी जीवन दान करने वाली महान शक्ति है। परिवार और समाज को प्रेरित करने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक है — यदि महिलाएँ संकल्प लें, तो अंगदान आंदोलन जनआंदोलन बन सकता है क्योंकि आज 65% अंगप्रत्यारोपित महिलाओं द्वारा दान किये अंगों से हों रहा है।
अंगदान के प्रति जनजागरूकता अभियान को व्यापक बनाया जाए।
विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रेरक कार्यक्रम आयोजित हों।
समाज में मिथकों और भ्रांतियों को दूर किया जाए।
प्रत्येक नागरिक “मृत्यु के बाद भी जीवन देने” का संकल्प ले।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों एवं आमजनों की उपस्थिति रही, जिससे वातावरण उत्साह, प्रेरणा और संवेदनशीलता से परिपूर्ण रहा।
अंत में आयोजकों ने सभी उपस्थित अतिथियों, दानवीरों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संकल्प दोहराया कि मानवता की इस सेवा-यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस कार्यक्रम में प्रतीक भोई, राकेश रत्नाकर, घनश्याम पांडे, रघुवंश सैनी, नोहर सिंह, रामकुमार लाडेर , भेखराम साहू, शिवाकांत गिरी, विष्णु यादव, तेज राम साहू, वेणु गोपाल देवांगन, अशोक सोनी, भागवत वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

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