7 यूनिवर्सिटी, 3 मेडिकल कालेज, फिर भी कैंसर स्क्रीनिंग में पिछड़ा

7 यूनिवर्सिटी, 3 मेडिकल कालेज, फिर भी कैंसर स्क्रीनिंग में पिछड़ा दुर्ग

​भिलाई।  राज्य की शिक्षाधानी भिलाई और उसका जिला दुर्ग 7 विश्वविद्यालय, तीन-तीन मेडिकल कालेज, आधा दर्जन डेंटल कालेज के बावजूद कैंसर की स्क्रीनिंग में फिसड्डी साबित हुआ। कैंसर स्क्रीनिंग में राज्य मे वह अंतिम पायदान पर खड़ा है। इसे जागरूकता का अभाव कहेंगे या लापरवाही पर आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के 33 जिलों मे दुर्ग अंतिम पायदन पर खड़ा है।

दुर्ग जिले में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, कामधेनु विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय पाटन के अलावा, रूंगटा यूनिवर्सिटी, भारती यूनिवर्सिटी, केके मोदी यूनिवर्सिटी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय भी हैं। दो निजी  और एक सरकारी मेडिकल कालेज के अलावा डेन्टल कालेज भी हैं।

29 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। पता चला कि स्थानीय जिम्मेदार नए वित्त वर्ष में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 38% लोगों की ब्लड प्रेशर व शुगर स्क्रीनिंग करा पाए हैं। इससे दुर्ग प्रदेश के सभी 33 जिलों में 32 वें स्थान पर चला गया है। जबकि बहुत पीछे रहने वाला जिला ​कोरिया 73% लोगों की स्क्रीनिंग करने के कारण प्रदेश में पहले और 32% की स्क्रीनिंग कर पाने से मनेंद्रगढ़-चिरिमिरी- भरतपुर प्रदेश में 33वें स्थान पर है।

ओरल और ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग में तो दुर्ग​ की स्थिति प्रदेश में सबसे बुरी है। 21% लोगों की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग और 23% की ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग करने से दुर्ग जिला प्रदेश में सबसे निचले पायदान यानी 33वें स्थान पर चला गया है। गर्भाशय कैंसर की स्क्रीनिंग में भी जिला प्रदेश में 27 वें स्थान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रीनिंग में लापरवाही जिले की सेहत के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि बीपी, शुगर, कैंसर आदि बीमारियों की जितनी जल्दी पहचान कर, इलाज शुरू कर दिया जाए, उसका दुष्प्रभाव कम होता है। स्क्रीनिंग में लापरवाही से कैंसर का कई बार चौथे स्टेज में पहुंच जाने पर पता चलता है।

सभी गैर संचारी बीमारियों की रोकथाम में 24वें नंबर पर: गैर संचारी बीमारियों में मुख्यत: ब्लड प्रेशर, शुगर व कैंसर को रखा जाता है। यद्यपि ये बीमारियां एक से दूसरे को नहीं होती है। लेकिन इनका उपचार नहीं किया जाए तो यह कई दूसरी बीमारियों को जन्म देने के साथ ही अंदरूनी अंगों को खराब करती है। इन सभी बीमारियों की पहचान में दुर्ग में बड़ी लापरवाही की गई है। प्रदेश स्तर पर दुर्ग जिले के विभाग को 100 में 32 नंबर दिया गया है। इस वजह से प्रदेश में जिले को ओवरऑल 24वां स्थान मिला है। ​कोरिया प्रदेश में पहले नंबर पर आया है।

Display pic courtesy Reid Health

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