इस तरह एक अंग्रेज अधिकारी का नाम पड़ गया “घोड़ा वाले बाबा”
जयपुर। अंग्रेजों ने भारत पर हुकूमत की। देश के संसाधनों को खूब लूटा और भारत वासियों को प्रताड़ित भी किया। जाते जाते विभाजन का एक अंतहीन दर्द भी देते गए। पर अंग्रेजों न बहुत कुछ दिया भी। उन्होंने देश का भ्रमण किया, कई पर्यटन स्थलों की पहचान की और इतिहास को सहेजने संजोने का काम भी किया। एक ऐसी ही अंग्रेज अधिकारी थे जेम्स टॉड। उन्होंने घोड़े पर घूम-घूम कर राजपुताना के इतिहास के साक्ष्य एकत्रित किए। राजस्थान का नामकरण भी किया। इसी के चलते उन्हें घोड़े वाले बाबा की संज्ञा मिली।
अपनी संस्कृति और परम्पराओं के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। राजस्थान शब्द दुनिया की नजर में तब आया जब, जब एक इतिहासकार ने इसे अपनी कलम से उकेरा और इसका नामकरण कर दिया। हम बात कर रहे हैं कर्नल जेम्स टॉड की, जिन्हें राजस्थान के इतिहास का जनक भी कहा जाता है। जेम्स टॉड को दरअसल ब्रिटिश काल में भारत में अधिकारी बनाकर भेजा गया था, जो अंग्रेजों और इस प्रदेश के राजाओं के बीच सामंजस्य बनाने और सेतु के रूप में काम कर रहे थे।
1818 से 1822, यानी मात्र 4 साल राजस्थान में रहे जेम्स टॉड को लेकर ये जानकारी मिलती है कि उन्होंने घूम-घूम कर राजस्थान के बारे में जाना। कर्नल टॉड को यह घोड़ा उदयपुर के महाराणा भीम सिंह ने उपहार में दिया था। इसका नाम बजराज था। कोटा में कर्नल टॉड की घोड़े पर सवार प्रतिमा के कारण इस स्थान को ‘घोड़े वाले बाबा सर्किल’ कहा जाता है।
अपने घोड़े पर बैठे जेम्स प्रदेश के लोगों के बीच जाते और उनसे मरुभूमि के बारे में जानकारी लेते। घोड़े पर घूम रहे इस शख्स को देख लोग उन्हें ‘घोड़े वाले बाबा’ भी कहने लगे। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में पहुंच टॉड ने करीब से इस ने जाना। आज भी टॉड राजस्थान में घोड़े वाले बाबा के नाम से फेमस है।
कहा जाता है कि जेम्स को राजस्थान इतना भाया कि वो ब्रिटिशियन उच्च अधिकारियों से भी राजस्थान की तारीफ करने लगे। जेम्स की राजस्थान प्रेम को देखते हुए और विद्रोह के खतरे को भांपते हुए अंग्रेजी हुकूमत ने उनका अचानक बीच कार्यकाल में ही ट्रांसफर कर लंदन भेज दिया।
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