गरीबी का परिचायक नहीं, बल्कि पौष्टिकता और सेहत से भरपूर है महुआ

गरीबी का परिचायक नहीं, बल्कि पौष्टिकता और सेहत से भरपूर है महुआ

कांकेर (गीता श्रीवास्तव)। बचपन में हम सुना करते थे कि बस्तर के वनवासी बहुत गरीब हैं। भूख लगने पर लोग महआ का फूल उबाल कर खा लेते हैं। हमें लगता था कि इससे नशा होता होगा और फिर वे खाली पेट ही सो जाते होंगे। पर हकीकत इससे कहीं अलग है। बस्तर के आदिवासियों को इस नेचुरल सुपरफूड के बारे में पता था। अब आधुनिक विज्ञान भी कह रहा है कि महुआ के फूल गरीबी का परिचायक नहीं बल्कि एक सुपरफूड है।

महुआ (Mahua) पारंपरिक जनजातीय ज्ञान और पोषण से भरपूर एक देसी सुपरफूड है, जो विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस है। यह विटामिन B, C, कैल्शियम (Calcium), आयरन (Iron) और पोटेशियम (Potassium) का बेहतरीन स्रोत है, जो हड्डियों की मजबूती, ब्लड सर्कुलेशन और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। महुआ से बनी कतली, लाटा (लड्डू) और अन्य खाद्य पदार्थ ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं।
महुआ का सेवन कमर दर्द और गठिया के मरीजों के लिए रामबाण माना जाता है। इसमें हल्के रेचक (laxative) गुण होते हैं, जो पाचन को ठीक रखते हैं और कब्ज से राहत दिलाते हैं। अध्ययनों के अनुसार, यह इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार कर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है । महुआ लाटा या लड्डू, विशेष रूप से सर्दियों में, शरीर को गर्म रखने और ऊर्जा देने के लिए एक पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता है।

महुआ का आधुनिक शहरी उपयोग

महुआ के फूल या फल से काजू कतली की तरह ही स्वास्थ्यवर्धक कतली (घी में फ्राई करके) बनाई जा सकती है। महुआ लाटा (लड्डू) महुआ को सुखाकर, भूनकर और अन्य ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर बनाया जाता है। सूखे महुआ के फूलों का उपयोग ओट्स, दही या स्मूदी में प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में किया जा सकता है। इसका उपयोग चाय और हर्बल टी के रूप में भी किया जा सकता है।

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