छत्तीसगढ़ के सभी समाज ला रहे संस्कारों में ये बड़े बदलाव
रायपुर। वैवाहिक समाराहों में अनिवार्य संस्कारों के साथ ही ऐसी बहुत सारी परम्पराएं जुड़ गई हैं जिसके कारण न केवल रिश्तों में खटास पैदा होती है बल्कि कई बार तो बाद बारात लौटा ले जाने या रिश्ता टूटने तक पहुंच जाती है। छत्तीसगढ़ इस मामले में अब पूरे देश की अगुवाई कर रहा है जहां ऐसी परम्पराओं को या तो गैरजरूरी करार दिया जा रहा है या फिर सीधे उनपर पाबंदी लगाई जा रही है।
बालोद जिले में सेन समाज ने शादी में प्रचलित जूता-छिपाई जैसी रस्मों को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सगाई के बाद और शादी से पहले युवक-युवती आपस में मोबाइल पर बातचीत नहीं करेंगे। बातचीत केवल माता-पिता की मौजूदगी में हो सकेगी। मंगनी या सगाई के बाद बिना उचित कारण रिश्ता तोड़ा जाता है, तो दोषी परिवार के खिलाफ समाज कड़ी सामाजिक कार्रवाई करेगा।
रिश्ता तय करने के दौरान लड़के या लड़की पक्ष से अधिकतम 15 लोगों के ही दूसरे पक्ष के घर जाने की सीमा निर्धारित की गई हैं। सगाई में अंगूठी की अनिवार्यता समाप्त कर केवल पुष्प भेंट का प्रावधान रखा गया है। वरमाला केवल विवाह में ही पहनाई जाएगी। विवाह की हर रस्म में 100-100 रुपए देने का सामान्य नियम बनाया गया है।
विधवा महिलाओं को पुत्र-पुत्री के विवाह और अन्य संस्कारों में पूर्ण अधिकार देने का फैसला लिया है। बेटा न होने की स्थिति में बेटियों को अंतिम संस्कार में कंधा देने की अनुमति दी गई है। मृत्यु के बाद कफन ओढ़ाने की प्रथा बंद कर मृतक परिवार को इच्छानुसार आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है। धर्मांतरण के मामलों में पहले समझाइश, फिर आवश्यक होने पर सामाजिक बहिष्कार का प्रावधान रखा गया है।
धोबी समाज में मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी
धोबी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सूरज निर्मलकर ने बताया कि धोबी समाज का प्रयास रहता है कि लड़के लड़कियां परिचय सम्मेलन में ही एक दूसरे को जानें। रिश्ते तय करने से पहले दूल्हा-दुल्हन दोनों पक्षों को मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होता है, जिससे सही उम्र पता चल सके और भविष्य की किसी असावधानी से बचा जा सके। इसके अलावा कार्यक्रम में कलेवा बनाने की अनिवार्यता खत्म की गई है।
डीजे और प्री वेडिंग शूट बंद- मनवा कुर्मी समाज
मनवा कुर्मी समाज के अध्यक्ष खोड़स राम कश्यप ने कहा कि मनवा कुर्मी समाज ने मृत्यु भोज पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा शादियों में डीजे और प्री वेडिंग शूट पर प्रतिबंध लगा हुआ है। किसी का निधन हो जाने पर कफन की संख्या 5 निर्धारित की गई है। इस प्रकार समाज लगातार प्रगति कर रहा है।
घाट पर चूड़ी उतारने की प्रथा बंद – साहू समाज
साहू समाज के अध्यक्ष पवन साहू ने बताया समाज में मऊर सौंपने की रस्म चालू की गई है। विधवा होने के बाद तालाब पर चूड़ी उतारने की प्रथा बंद की गई है। घर पर ही महिलाएं चूड़ी उतार सकती है। समाज में प्री वेडिंग शूट की प्रथा बंद की गई है।
कुर्मी समाज तैयार कर रहा पुरोहित
कुर्मी समाज में कुल 30 उपजाति हैं, जिनका अलग-अलग अधिवेशन कर सामूहिक विवाह किया जाता है। समाज में पुरोहित तैयार किए जा रहे हैं। जो अलग-अलग संस्कार करवा सकेंगे।
पटेल समाज में बूफे पर प्रतिबंध
पटेल समाज ने शादी सहित कार्यक्रम में बुफे सिस्टम पर प्रतिबंध लगाया है। शादी में सिर्फ दाल-चावल, बड़ा, पुड़ी औप एक मीठा का प्रावधान है। महिलाओं को आगे लाने का प्रयास किया जा रहा है।
मराठी समाज भी आया सामने
मराठी समाज में जिस घर में किसी की मौत होती है वहां 25 लोगों के लिए खाना भेजा जाता है। बच्चों में संस्कार डालने के लिए स्वतंत्रता सैनानियों की जयंती और पुण्यतिथि मनाई जाती है। हर माह की 19 तारीख को शिवाजी महाराज की महाआरती की जाती है। हर शनिवार को हनुमान चालीसा का वृहद स्तर पर पाठ किया जाता है।
राजपूत समाज का बड़प्पन
राजपूत समाज में गरीब परिवारों के विवाह के लिए ठाकुर विग्र हरण भवन सरोना को निशुल्क दिया जाता है। जरूरतमंद लोगों के विवाह का खर्च उठाया जा रहा है।
निषाद समाज में मृत्युभोज बंद
निषाद समाज में मृत्युभोज बंद कराकर जिस घर में गमी हुई है उनके यहां जाकर आर्थिक रूप से सहयोग करने का निर्णय लिया गया है। शादी के कुछ सालों के अंदर ही पति की मृत्यु हो जाती है तो ससुराल वाले बहू का पुनर्विवाह करा सकते हैं, ये बदलाव किया गया है।
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