जानें क्या है कोरिया मोदक जो बचा रही कुपोषित जच्चा-बच्चा की जान
कोरिया मोदक छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की एक अभिनव और सफल स्वास्थ्य पहल है, जिसे गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए शुरू किया गया है। यहां सिकल सेल पीड़ितों की अच्छी खासीसंख्या है। कुपोषण दर भी काफी ऊंचा है जिसके कारण गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। आईएएस अधिकारी चंदन संजय त्रिपाठी ने परंपरा पर आधारित एक सरल लेकिन प्रभावी समाधान निकाला। इसे कोरिया मोदक, कोरिया लड्डू अथवा मदर्स मोदक के नाम से भी जाना जाता है।
कोरिया मोदक का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और शिशुओं में कम वजन (Low Birth Weight) की समस्या को दूर करना है। इसे स्थानीय और पारंपरिक मोटे अनाजों जैसे रागी, बाजरा, सत्तू, बेसन, मूंगफली, तिल, गुड़, शुद्ध देसी घी, सोंठ और इलायची से तैयार किया जाता है।
गर्भवती महिलाओं को रोजाना सुबह-शाम 20-20 ग्राम के दो लड्डू खिलाए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस पहल से जिले में जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों के मामलों में लगभग 57% तक की कमी दर्ज की गई है।
इन लड्डुओं को स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के स्व सहायता समूहों द्वारा स्वच्छ वातावरण में बनाया जाता है, जिससे उन्हें हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक की आय भी हो रही है। ‘पोषण संगवारी’ के नाम से पहचानी जाने वाली महिलाएं घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को ये लड्डू खिलाना सुनिश्चित करती हैं।
यह मॉडल अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सफलता के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।
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