बिहान : पारम्परिक “इमली लाटा” से आत्मनिर्भर बनीं राखी ध्रुव
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्वाद ‘इमली लाटा’ को आजीविका का साधन बनाकर बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के ग्राम अर्जुनी निवासी राखी धु्रव ने आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। मेहनत, नवाचार और परंपरा को सहेजने की भावना के साथ उन्होंने इस पारंपरिक उत्पाद को न केवल अपनी पहचान बनाया, बल्कि इससे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है।
विकासखंड बलौदाबाजार अंतर्गत ग्राम अर्जुनी की निवासी राखी धु्रव बताती हैं कि उनकी सफलता की शुरुआत तब हुई जब वे रायपुर में अपने एक रिश्तेदार के घर गई थीं। वहां उन्होंने आसपास की महिलाओं को पारंपरिक तरीके से इमली लाटा बनाते हुए देखा। इस कार्य में छिपी संभावनाओं को समझते हुए उन्होंने इसके बारे में जानकारी जुटाई और अपने गांव लौटकर बिहान समूह से जुड़कर इसे व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया।
राखी ध्रुव अपने व्यवसाय के लिए कच्चे माल के रूप में इमली की खरीदी भाटापारा से करती हैं, जबकि उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग के लिए डिब्बे बिलासपुर से मंगवाती हैं। घर पर ही अन्य समूह की महिलाओं के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने इस गतिविधि को सफल व्यवसाय में बदल दिया है।
वर्तमान में वे इस कार्य से प्रतिवर्ष लगभग 1.5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण बेहतर ढंग से कर पा रही हैं। राखी बताती हैं कि अब आसपास के लोग उन्हें प्यार से ‘लखपति दीदी’ कहकर बुलाते हैं, जो उनके लिए गर्व की बात है।
राखी धु्रव के पति श्री जलेश्वर धु्रव गांव में टेलरिंग और जूते की दुकान का संचालन करते हैं। राखी के मन में स्वयं कुछ करने की इच्छा थी, जिसे इमली लाटा के इस व्यवसाय ने नई दिशा दी। वे अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देती हैं।
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