बीवी है नौकरानी नहीं... खाना बनाने, कपड़े धोने में आप भी मदद करें

बीवी है नौकरानी नहीं… खाना बनाने, कपड़े धोने में आप भी मदद करें

नई दिल्ली। पति को खाना पकाने, सफाई और कपड़े धोने जैसे घरेलू कामों में पत्नी की बराबर मदद करनी चाहिए। आप किसी नौकरानी से नहीं बल्कि जीवन साथी से शादी की है… ये तल्ख टिप्पणी है सुप्रीम कोर्ट की। पत्नी-पत्नी के बीच घर के कामकाज को लेकर हुई आपसी लड़ाई अदालत की दहलीज तक पहुंच गई। पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि पत्नी अगर खाना नहीं बना पाती या घर के काम ठीक से न कर पाती, ऐसे आरोपों को ‘मानसिक क्रूरता’ का आधार नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि वक्त अब बदल चुका है। आज के समय में पति को भी घरेलू कामों में पत्नी का हाथ बंटाना चाहिए, उसकी मदद करनी चाहिए। खाना पकाना हो या साफ सफाई करना, घर के हर काम में पति को पत्नी की बराबर मदद करनी चाहिए, क्योंकि आप किसी नौकरानी से तो शादी नहीं कर रहे हैं। ये टिप्पणियां जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। अदालत ने क्रूरता के आधार पर उस व्यक्ति को तलाक देने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिककर्ता के वकील ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता विफल रही। उनकी शादी 2017 में हुई थी और 2019 से वे अलग रह रहे हैं। तलाक की मांग कर रहे याचिकाकर्ता ने कहा कि निचली अदालत ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर दिया। मैं तलाक चाहता हूं। इस पर बेंच ने उससे पूछा कि इस मामले में कथित क्रूरता क्या थी।

इस पर याचिकाकर्ता मे वकील ने कहा कि महिला अनुचित व्यवहार करती थी और खाना नहीं बनाती थी। इस पर जस्टिस नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपको इन सभी कामों में बराबर हिस्सा लेना चाहिए। खाना बनाना, सफाई करना, कपड़े धोना, सब कुछ। आज का समय अलग है।” उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का ये कहना सही था कि यह क्रूरता का आधार नहीं हो सकता, क्योंकि आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं। आप एक जीवन साथी से शादी कर रहे हैं।

बता दें कि पति-पत्नी एक सरकारी स्कूल में काम करते हैं। इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाएं। हम उनसे बात करना चाहेंगे। कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की है। इस दौरान उसने दोनों पक्षों को उपस्थित रहने को कहा है।

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