महिला सशक्तिकरण पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय सम्मेलन

महिला सशक्तिकरण पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय सम्मेलन

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग एवं आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति के मार्गदर्शन में शंकराचार्य महाविद्यालय में 11-12 मार्च 2026 को महिला आर्थिक सशक्तिकरण : चुनौतियाँ एवं अवसर विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. आरके शुक्ला, निदेशक, आशा पारस फाउंडेशन ने संस्था की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा में लैंगिक समानता की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. शुक्ला ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण और जेंडर संवेदनशीलता से भी जुड़ा है।
कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त भारत का आधार है। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए स्वरोजगार एवं लघु उद्योग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
दुर्ग महापौर अल्का बाघमार ने महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु शासन की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए शिक्षा के महत्व पर बल दिया। डॉ. कुसुम त्रिपाठी ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर विचार व्यक्त करते हुए उनके श्रम और योगदान को उचित मान्यता देने की जरूरत बताई।
ज्वाइंट डायरेक्टर, रूसा एमएस गुप्ता ने कहा कि महिलाओं का सम्मान ही वास्तविक सशक्तिकरण का आधार है।
कार्यक्रम में श्री गंगाजली एजुकेशन सोसायटी के चेयरमैन आईपी मिश्रा, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप, दाऊ बलराम साहू, डॉ. अर्चना झा तथा डॉ. जे. दुर्गा प्रसाद राव सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। प्रथम सत्र के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया तथा आभार प्रदर्शन भूपेंद्र कुलदीप द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. नीतू श्रीवास्तव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग ने किया।
उद्घाटन सत्र में प्रो. आरके शुक्ला, निदेशक, आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन ने शिक्षा और समान अवसरों को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया। प्रमुख वक्ता डॉ. आशा शुक्ला ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन से संभव है। श्रीमती अलका बाघमार, महापौर दुर्ग तथा डॉ. सुनीता पाठक ने भी अपने उद्बोधनों में महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. कुसुम त्रिपाठी ने भारतीय समाज में महिलाओं की बहुआयामी भूमिका पर विचार व्यक्त किए। कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लघु उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों तथा स्व-रोजगार को बढ़ावा देने पर बल दिया।
तकनीकी सत्रों में डॉ. शोभा शिंदे, डॉ. रत्ना मुले, डॉ. वीणा सिन्हा तथा डॉ. सबीहा हुसैन ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, जेंडर बजटिंग तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। द्वितीय दिवस के सत्र में बलदाऊ राम साहू, डॉ. भारती शुक्ला, डॉ. विनय शर्मा एवं डॉ. रीता वेणु गोपाल ने महिला अधिकार, समान अवसर एवं कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रकाश डाला।
समापन सत्र में श्री सत्य नारायण राठौर, आयुक्त, दुर्ग संभाग ने महिला शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि समाज की प्रगति महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही संभव है। प्रख्यात समाजसेवी श्रीमती फूलबसन यादव ने महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता को सशक्त समाज की आधारशिला बताया। इस अवसर पर अतिथि वक्ता डॉ. सबीहा हुसैन ने महिला सशक्तिकरण में सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं डॉ. आशा शुक्ला एवं प्रो. आर. के. शुक्ला ने शिक्षा को महिलाओं के समग्र विकास का प्रमुख माध्यम बताया।

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