MP के सीधी में मिला 12 मीटर लंबा रहस्यमयी कंकाल? 250000 लाख साल पुराने बताए जा रहे जीवाश्म

Edited by: मुनेश्वर कुमार•Reported by: Amarjeet Singh|टाइम्स न्यूज नेटवर्क•20 Mar 2026, 11:01 am IST
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Proboscidean Fossils Found In Sidhi: सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक स्थित पहाड़ियों पर हजारों साल पुराने अवशेष मिले हैं। यह प्राचीन हाथियों के पूर्वजों का हो सकता है। इन कंकालों की कार्बन डेटिंग करवाई जाएगी। इसके बाद सही उम्र की जानकारी मिल पाएगी।
Fossils Found In Sidhi
ढाई लाख साल पुराने जीवाश्म मिले
सीधी : मध्य प्रदेश के सीधी जिले की पहाड़ियों पर एक पुराना जीवाश्म मिला है। यह जीवाश्म बड़ी पुरातात्विक खोज साबित हो सकती है। पुरातत्व विभाग की टीम इसकी जांच कर रही है। पहाड़ियों पर मिले जीवाश्म के बारे में माना जा रहा है कि 25,000 से ढाई लाख साल तक पुराने हो सकते हैं। वहीं, पुरातत्विविदों ने शुरुआती सर्वे के बाद कहा कि साइंटिफिक डेटिंग से अभी इनकी सही उम्र की पुष्टि होना बाकी है।

टीम को दांतों और हड्डियों के कुछ टुकड़े मिले
दरअसल, ये अवशेष सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक स्थित कोराउली कला गांव के पास अत्रेला पहाड़ी पर मिले हैं। यहां सतना के पीएम श्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की एक टीम ने स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर शुरुआती खोजबीन की थी। इसी दौरान दांतों और हड्डियों के कुछ टुकड़े मिले हैं। यह देखने में बड़े स्तनधारियों के लगते हैं। ये अवशेष प्राचीन हाथियों के पूर्वजों से संभावित जुड़ाव की ओर इशारा करते हैं।

 

स्थानीय लोगों से मिली थी जानकारी
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए सतना के पीएम श्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रिंसिपल डॉ एससी राय ने कहा कि हमें इस बारे में स्थानीय लोगों से पता चला, जिसके बाद हमने यह पहल की है। हमारे कॉलेज के कुछ विशेषज्ञ वहां गए और कुछ जीवाश्म वहां से लेकर आए।

 

उन्होंने कहा कि अनुमान के मुताबिक ये जीवाश्म प्रोबोसिडियन युग के हैं। हलांकि इनकी डेटिंग अभी होनी बाकी है। फिर भी हमारी जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि यह इलाका जीवाश्मों के मामले में बहुत समृद्ध है, क्योंकि यह एक उल्कापिंडीय क्षेत्र रहा है। हम आगे की खोजबीन के लिए दूसरे संस्थानों से बातचीत कर रहे हैं।

 

सोन नदी घाट क्षेत्र में आता है यह क्षेत्र
इसके साथ ही विशेषज्ञों ने बताया कि यह क्षेत्र सोन नदी घाटी के अंतर्गत आता है। अपने प्राचीन तलछटी निक्षेपों के लिए जाना जाता है। जीवाश्म की खोज टीम में शामिल रहे डॉ हर्षित सोनी ने कहा कि यह सोन नदी की घाटी है। हमें स्थानीय लोगों से जानकारी मिली थी कि यहां लगभग 12 मीटर लंबा एक कंकाल है। इस बारे में जब हमें पता चला तो हमने प्रिंसिपल से अनुमति ली और खोजबीन के लिए स्थानीय अधिकारियों से अनुमति मांगी।

उन्होंने कहा कि वहां पहुंचने पर सिर्फ हमें दांत और हड्डियां मिली हैं। दांत के पैटर्न से पता चला कि यह किसी शाकाहारी जानवर का हो सकता है। इनेमल का पैटर्न बताता है कि यह प्लेइस्टोसीन युग का हो सकता है। यह 25,000 से 2,50,000 साल पुराना है। इसकी सही तारीख ज्यादा सटीक वैज्ञानिक डेटिंग के बाद साफ हो पाएगी।

हम इन अवशेषों को सुरक्षित रख रहे हैं। इन्हें फिर से जोड़कर इनका ढांचा तैयार करेंगे। ऐसा लगता है कि यह पूरा इलाका पहले उल्कापिंडों की गतिविधियां का केंद्र रहा होगा, इसलिए यहां जीवाश्मों की भरमार है। नमूने काफी पुराने हैं। इसलिए इनकी सही उम्र का पता लगाने के लिए यूरेनियों डेटिंग एक संभावित तरीका हो सकता है।
डॉ हर्षित सोनी, पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज, सतना

 

यूरेनियम डेटिंग से उम्र की जानकारी मिलेगी
वहीं, इस खोजबीन से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जीवाश्मों की सही उम्र और वर्गीकरण का पता लगाने के लिए यूरेनियम डेटिंग और विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययनों की जरूरत होगी। अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह खोज विंध्य क्षेत्र में प्रागैतिहासिक काल की दुर्लभ खोजों में से एक हो सकती है। साथ ही यह भी संकेत हैं कि इस इलाके में प्राचीन जीवन से जुड़े ऐसे और भी दबे हुए सबूत मिल सकते हैं।

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