हाइपो-हाइपर ही नहीं थायराइड की ये समस्याएं भी कर सकती हैं परेशान

हाइपो-हाइपर ही नहीं थायराइड की ये समस्याएं भी कर सकती हैं परेशान

शिक्षित आबादी में थायराइड की चर्चा काफी होती है। खासकर हाइपो और हाईपर थायराइड के बारे में लगभग सभी को पता है कि इससे व्यक्ति एकाएक सूखने लगता है या फिर उसका वजन बढ़ने लगता है। पर क्या आपको पता है कि थायराइड इसके अलावा भी कई काम करती है जिसमें गड़बड़ी से कैंसर तक की बीमारी हो सकती है ?
हमारी गर्दन के सामने स्थिति तितली के आकार की थायराइड ग्लैंड (एंडोक्राइन ग्रंथि) शरीर में टी 3 और टी 4 नामक हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल, हृदय गति, शरीर के तापमान और कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं।

NBT में प्रकाशित खबर के मुताबिक थायराइड डिसऑर्डर की सबसे आम समस्याओं में हाइपोथायरायडिज्म , हाइपरथायरायडिज्म, थायरॉइडाइटिस, घेंघा (Goiter) और थायराइड कैंसर शामिल हैं। यदि समय पर इनकी पहचान की जाए अधिकांश थायराइड रोगों का इलाज संभव है, लेकिन थायराइड कैंसर को सबसे गंभीर माना जाता है क्योंकि यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।

क्लिवलैंड क्लीनिक के अनुसार थायरॉइड ग्रंथि कई कारणों से प्रभावित हो सकती है, इनमें ऑटोइम्यून रोग, आयोडीन की कमी या अधिकता, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, आनुवंशिक कारण, रेडिएशन एक्सपोजर और कुछ दवाओं का उपयोग को शामिल किया जाता है।

हाइपोथायरायडिज्म
हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। यह महिलाओं और बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है। इसके लक्षणों में लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड अधिक लगना, कब्ज, त्वचा का सूखापन, बाल झड़ना आदि को शामिल किया जाता है।

हाइपरथायरायडिज्म
इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। इसके मुख्य लक्षण में तेजी से वजन घटना, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट और चिंता, ज्यादा पसीना आना, हाथ कांपना और नींद की समस्या को शामिल किया जाता है। ग्रेव्स डिजीज हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण माना जाता है।

थायरॉइडाइटिस
थायरॉइडाइटिस का मतलब है थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आना। यह संक्रमण, ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया या प्रसव के बाद होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण हो सकता है। इसमें व्यक्ति को गर्दन में दर्द या संवेदनशीलता, थकान, हार्मोन स्तर में उतार-चढ़ाव, वजन में बदलाव महसूस हो सकता है।

घेंघा (Goiter)
मैयोक्लीनिक के मुताबिक थायरॉइड ग्रंथि का असामान्य रूप से बढ़ जाने को घेंघा कहा जाता है, इसमें व्यक्ति की गर्दन आगे की ओर बढ़ जाती है। यह आयोडीन की कमी, थायरॉइड हार्मोन असंतुलन या अन्य थायरॉइड रोगों के कारण हो सकता है। इसमें व्यक्ति को गर्दन में सूजन, निगलने में परेशानी, सांस लेने में कठिनाई और गले में दबाव महसूस होता है। डब्लूएचओ के अनुसार आयोडीन की कमी दुनिया भर में घेंघा का एक प्रमुख कारण रही है।

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