पित्त दोष का शमन करने के लिए अपनाएं ये घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे
अत्यधिक गर्मी लगना, सीने में जलन, खट्टी डकारें, अधिक प्यास, मुंह में कड़वाहट, त्वचा पर लालिमा और चिड़चिड़ापन शामिल हो रहा है तो आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त बढ़ने का संकेत हो सकता है। पित्त पाचन क्रिया के लिए आवश्यक माना जाता है। पित्त बढ़ने से होने वाली परेशानी को आप घर पर ही आसानी से शांत कर सकते हैं। आगे जानते उन उपायोंं के बारे में जिनसे आप इस समस्या में आराम पा सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष अग्नि और जल तत्व से मिलकर बना है और यह पाचन, शरीर का तापमान, भूख, त्वचा की चमक और मानसिक अशांति को नियंत्रित करता है। जब पित्त बढ़ जाता है, तो शरीर में गर्मी, जलन, एसिडिटी, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
पित्त बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण खानपान माना जाता है। अधिक मसालेदार, खट्टा, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड शरीर में गर्मी पैदा कर सकता है। इसके अलावा देर रात तक जागना, तनाव लेना, भोजन छोड़ना और गर्म मौसम में पर्याप्त पानी न पीना भी पित्त वृद्धि का कारण बन सकता है। आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में उल्लेख मिलता है कि अत्यधिक तीखे, अम्लीय और गर्म तासीर वाले आहार पित्त को बढ़ा सकते हैं।
पित्त शांत करने के लिए करें ये उपाय –
सुबह उठने के तुरंत बाद गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच गाय का घी लेना पित्त को कम करने का एक बेहतरीन तरीका है। इसे आप रोजाना की दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। प्रभाव दिखने में थोड़ा समय लग सकता है आप धैर्य के साथ इसे अपनाएं। खीरा, लौकी, तरबूज, खरबूजा और अनार जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन लाभदायक माना जाता है। इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है जो शरीर की गर्मी कम करने में मदद कर सकती है। आयुर्वेद में सौंफ और धनिया को शीतल प्रकृति का माना गया है। भोजन के बाद सौंफ चबाना पाचन तंत्र को आराम देने में मदद कर सकता है। सौंफ पाचन क्रिया को बेहतर करके भोजन को पचाने में सहायक होता है।
नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत है और गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसे पित्त शांत करने वाला पेय माना गया है। पित्त प्रकृति वाले लोगों को बहुत ज्यादा धूप, शराब और खट्टी या नमकीन चीजों से दूर रहना चाहिए।
शरीर की गर्मी को कंट्रोल करने के लिए ठंडे पानी से नहाना चाहिए और ज्यादा गर्म पानी से स्नान करने से बचें। शीतली प्राणायाम, शीतकारी प्राणायाम और ध्यान मन को शांत करने के साथ शरीर की गर्मी कम करने में सहायक माने जाते हैं। नींद की कमी शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ा सकती है, जिससे शरीर में गर्मी और सूजन संबंधी प्रतिक्रियाएं बढ़ सकती हैं।
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