सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही पॉक्सो में ‘रोमियो जूलियट क्लॉज’ की बात
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) एक्ट में ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ को शामिल करने पर विचार करने को कहा है। इसका मकसद किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों को कठोर POCSO धाराओं के दुरुपयोग से बचाना है। प्रेम विवाह के मामलों में सिर्फ तकनीकी पेंचों के कारण एक साथ कई जिन्दगियां बर्बाद हो रही है। ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चे बिना कोई गुनाह किये भी सजा भोग रहे हैं।
बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए Pocso एक्ट, 2012 बनाया गया था। लेकिन इस कानून के दुरुपयोग ने कई जिंदगियों को तबाह किया है। दरअसल इस कानून ने सहमति से बने दो नाबालिगों के बीच शारीरिक संबंधों को भी अपराध मान लिया और अपराधी को कम से कम 10 साल की जेल हो सकती है।
इसीलिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ लाने पर विचार करने को कहा, क्योंकि कानून के जाल में सहमति से बने रिश्ते का एक और मामला फंसा हुआ है। जस्टिस संजय करोल ने 9 जनवरी के फैसले में कहा, ‘किसी लड़की के परिवार के कहने पर, जो रोमांटिक रिश्ते पर एतराज जताते हैं, पॉक्सो केस दर्ज करना आम बात हो गई है और इसी वजह से ये जवान लड़के जेलों में सड़ रहे हैं।’
सरकारी डेटा से पता चलता है कि 2023 में पॉक्सो के तहत रजिस्टर हुए 40,846 बच्चों में से 21,318 या 52% लड़कियां 16-18 साल की थीं। दिल्ली के एक सरकारी वकील कहते हैं, ‘हमें पता होता है कि मामला आपसी सहमति से है, तब भी हमारे हाथ बंधे होते हैं। हमें कोर्ट के सामने अपना गुनाह कबूल करने के लिए मजबूर किया जाता है।’ यह कानून जिंदगियां उलट-पुलट कर रहा है।
दरअसल, प्रेम विवाहों के मामले में लड़की पक्ष आरोप लगाता ही है। पहला हथियार होता है कि लड़की ने जब संबंध बनाए तो वह नाबालिग थी। यह सीधे सीधे रेप का मामला बनता है। इस पर पॉक्सो की धाराएं लग जाती हैं। कभी कभी तो लड़की वालों की शिकायत झूठी होती है। पर ऐसे मामलों में लड़के जेल भेज दिये जाते हैं। लड़की अकेली पड़ जाती है। यदि वह गर्भवती हो गई हो तो दोहरी मुसीबत में फंस जाती है। या तो उसका अबार्शन करा दिया जाता है और किसी के भी मत्थे मढ़ दिया जाता है या फिर वह बच्चे को बिना उसके पिता के अकेले पालने को विवश हो जाती है। कई बार तो लड़के का पूरा परिवार अपराध में सहयोग करने के नाम पर पिस जाता है।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से कहा है कि वह पॉक्सो एक्ट में ‘रोमियो जूलियट क्लॉज’ को भी शामिल करे ताकि यदि आपसी सहमति से लगभग बालिग लोगों के बीच रिश्ते बनते हैं तो उनसे सहजता से निपटा जा सके।
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