उम्र भर परेशान कर सकती है सड़क हादसों से जुड़ा यह खतरा
भिलाई। जनवरी से नवम्बर 2025 के बीच लगभग 25 हजार लोगों की सड़क हादसों में मौत हो गई। इससे दोगुनी से भी अधिक संख्या में लोग घायल हो गए। सड़क हादसों में हड्डियों का टूटना या चटखना आम बात है। पर ये चोटें तब और गंभीर हो जाती हैं जब वहां की मांसपेशियां भी जख्मी हो जाती हैं और त्वचा फट जाती है। इससे हड्डियों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है जो कभी कभी उम्र भर परेशान करते हैं।
हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ दीपक कुमार सिन्हा बताते हैं कि हड्डियों के संक्रमित होने के कारण जख्म को कई-कई बार खोलना पड़ जाता है। इसलिए बड़े अस्पतालों में पूरी कोशिश होती है कि पहले जख्म का इलाज किया जाए। इसके लिए घाव की अच्छे से सफाई करनी होती है। मरीज के होशोहवास में रहते यह कठिन होता है इसलिए मरीज को एनेस्थीसिया देकर यह सफाई करनी पड़ती है।
हड्डियों की सर्जरी यदि बहुत जरूरी न हो तो मरीज को पहले दो तीन दिन एन्टीबायोटिक पर रखा जाता है। इससे शरीर में पनपने वाले दूसरे संक्रमण काबू में आ जाते हैं। इसके बाद की गई सर्जरी कहीं ज्यादा सेफ होती है। इसमें मरीज के संक्रमित होने का खतरा बहुत कम हो जाता है और बुखार आदि जैसी समस्याएं भी नहीं आतीं।
उन्होंने बताया कि हाल ही में एक सरदार जी दुर्घटनाग्रस्त होकर पहुंचे। उनके घटने, कलाई और कूल्हे में चोटें थीं। कलाई की चोट खुली हुई थी। इसलिए पूरा सावधानी से पहले उसकी सफाई की गई। अच्छी बात यह रही कि सर्जरी के बाद उन्हें किसी भी प्रकार का संक्रमण नहीं हुआ और न ही कभी बुखार आया। रिकवरी भी अच्छी है और उम्मीद है कि जल्द ही वे चलने-फिरने लगेंगे और कलाई भी पूर्ववत काम करने लगेगी।
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