निगम ऐसा कर रहा विकास की हितग्राहियों के निकल रहे आंसू
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में फिलहाल विकास की गाड़ी सरपट भाग रही है। कहीं सड़कें बनाई जा रही हैं तो कहीं नालियां खोदी जा रही हैं। न कोई योजना है, न कोई नक्शा – बस करोड़ों रुपए समय सीमा में खर्च करना का टारगेट है। बारिश से पहले किसी भी की्मत में ये दोनों कार्य पूरे किए जाने हैं। बेशक नालियां गलत दिशा में बनें, ऊंची सड़कों के कारण मकान डूब जाएं पर निगम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
नेताजी का रैंप बचाने गजब का स्टंट
पहला उदाहरण है वार्ड 13 साकेत नगर का। यहां नगर निगम द्वारा लगभग एक करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। फिलहाल यहां नाली निर्माण विवादों में है। पहले जेसीबी से सड़क के एक तरफ नाली खोद दी गई। पर एक नेता का घर रास्ते में आ गया। नाली निर्माण के लिए अतिक्रमण कर बनाया गया उनका रैंप कट जाता। इसलिए खोदने का काम यहीं तक जाकर रुक गया। फिर नगर निगम के इंजीनियर आए औऱ नाली दूसरी तरफ खोदने का निर्देश दे दिया। दूसरी तरफ के रहवासियों ने अपनी व्यवस्था खुद ही कर रखी थी। इधर नाली निर्माण की कोई जरूरत ही नहीं थी। पर निगम को किसी भी कीमत पर नाली बनवानी थी। इसलिए बनी बनाई नाली को तोड़कर अब फिर से नाली बनायी जा रही है। रहवासियों ने नगर निगम को पत्र भी लिखा पर किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
यहां सड़क की वजह से डूबेंगे घर
दूसरी उदाहरण है, वार्ड-2 मॉडल टाउन का। यहां कंक्रीट की नालियां बनाई जा रही हैं। इससे उन सड़कों को तो राहत मिलेगी जहां पहले सड़क नहीं थी या बुरी तरह से टूट-फूट गई थी। पर जिन सड़कों का पहले ही कंक्रीटीकरण हो चुका है, उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। यहां संकट दूसरा है। इस वार्ड में कई मकान 30-35 या 40 साल तक पुराने हैं। जब पिछली बार सड़क बनी तो इऩमें से कई मकानों का फर्श सड़क के समतल हो गया। बारिश का पानी घरों में घुसने लगा। अब यदि इन सड़कों की हाइट और बढ़ी तो बारिश में घर डूब जाएंगे।

निर्माण कार्यों के चलते रास्ता बंद
मॉडल टाउन की सड़कें काफी लंबी हैं। इनमें से अधिकांश सड़कों का उत्तरी छोर एक तरफ से बंद है। निर्माण एजेंसी ने इसी छोर को मटेरियल गिराने के लिए चुना है। यहां ऊंची कंक्रीट की सड़क पर रेत और गिट्टी की ऐसी ढेरियां लगाई गई हैं कि लोगों का आनाजाना बंद हो गया है। अगर इन सड़कों पर किसी की तबियत बिगड़ी तो उसे उसी तरह बाहर ले जाना होगा जिस तरह बस्तर के दूरस्थ गांवों से मरीजों को सड़क तक लाया जाता था।
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