प्राचीन श्री चन्द्रमौलिश्वर मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र

प्राचीन श्री चन्द्रमौलिश्वर मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र

दुर्ग, 16 फरवरी (आरएनएस)। सौ साल से अधिक प्राचीन सोठ भाठागांव में स्थित श्री चन्द्रमौलिश्वर मंदिर शिवभक्तों की आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि यहां साक्षात भगवान शिव चन्द्रमौलिश्वर के रूप में विराजमान हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं।
वर्तमान मंदिर परिसर के स्थान पर पहले एक तालाब हुआ करता था, जिसके किनारे यह प्राचीन मंदिर स्थित था। मंदिर परिसर में रखे छोटे पत्थर माता लक्ष्मी के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं बाहर प्रांगण में रखा बड़ा पत्थर नाग देवता का प्रतीक है तथा छोटा पत्थर बजरंगबली का स्वरूप माना जाता है। मंदिर के दाहिने ओर स्थापित बजरंगबली की प्रतिमा पूर्व से ही विराजमान है, जबकि बायीं ओर कोने में स्थापित प्रतिमा को मंदिर से लाकर पुन: स्थापित किया गया है।
शिवभक्तों का विश्वास है कि श्री शिवाय नमोस्तुभ्यम, हर-हर महादेव, जय-जय भोलेनाथ, जय-जय शिवशंकर का श्रद्धापूर्वक जाप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन सफल बनता है।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान शिवभक्तों ने सेवा भाव से बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिवभक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है, जहां आकर भक्तों को आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। कार्यक्रम में प्रशांत कुमार शिरसागर, संतोष वर्मा, प्रभात वर्मा, राजेश वर्मा, सोनी जी, राजेश कुशवाहा, बी.सी.एन.जी. श्रीवास्तव, भैय्याजी सहित समस्त शिवभक्तों ने सेवा एवं प्रसाद वितरण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मंदिर में पूरे वर्ष भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, किंतु महाशिवरात्रि पर यहां विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिलता है।

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