जनास्था के केन्द्र हैं बालोद के भूईंफोड़ गणेश, बढ़ता ही जा रहा आकार
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद में भगवान गणेश जी का एक 100 साल पुराना मंदिर है। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से संतान की इच्छा पूरी होती है। ये मंदिर बालोद के मरारपारा में स्थित है। श्रद्धालुओं बताते हैं कि, मंदिर में स्थित भगवान की मूर्ति जमीन से प्रकट हुई है, जो लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसलिए इसे भूमि फोड़ गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।गणेश मंदिर के सदस्य और पार्षद सुनील जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय के मरारापारा (गणेश वार्ड) में लगभग 100 साल पहले जमीन के भीतर से भगवान गणेश प्रकट हुए थे। सबसे पहले स्व. सुल्तानमल बाफना और भोमराज श्रीमाल की नजर पड़ी थी। बाफना परिवार के किसी सदस्य के सपने में बप्पा आए थे, जिसके बाद दोनों व्यक्तियों ने स्वयं-भू गणपति के चारों ओर टीन शेड लगाकर एक छोटा-सा मंदिर बनाया था। इसके बाद लोगों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का विस्तार होता गया।
जैन ने बताया कि बाफना परिवार और मोरिया मंडल परिवार के सदस्य पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। स्वयं-भू श्री गणेश के घुटने तक का हिस्सा अभी भी जमीन के भीतर है। देखने वाले बताते हैं जब भगवान गणेश की मूर्ति बढ़ती है, तो कभी-कभी जमीन में दरारें पड़ने लग जाती है।
भक्तों का कहना है कि पहले मूर्ति का आकार काफी छोटा था, लेकिन धीरे धीरे बढ़ता गया। आज बप्पा विशाल रूप में हैं। आकार लगातार बढ़ता देख भक्तों ने वहां पर मंदिर बनाया। अब मंदिर में दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। भगवान गणेश की पूजा कर मन्नत मांगते हैं वह पूरी भी होती है।
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