कहां गायब हो गयी जावेद अख्तर और रहमान की ये चहेती सुरीली आवाज
बालीवुड ही क्यों, लगभग सभी क्षेत्रों में चलने वाली अंदरूनी राजनीति, हुनरमंदों को असमय अंधकार में धकेल देती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ इस सिंगर केसाथ जिसे कभी सोनी-स्टारडस्ट बेस्ट सिंगर का अवार्ड मिला था। जावेद अख्तर की पसंद बनकर वे इंडस्ट्री में आईं और फिर एआर रहमान के साथ कुछ ऐसे जुड़ीं कि लोग उन्हें एआर रहमान की पेट फीमेल वॉयस कहने लगे। जोधा अकबर जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दे चुकीं ये सिंगर न जाने कहां खो गईं।
आज हम बात कर रहे हैं सिंगर मधुश्री की। ये नाम शायद ज्यादा लोग नहीं जानते हैं, लेकिन इनका कोई भी गाना सुनेंगे तो कहेंगे ‘अरे ये इन्होंने गाया है क्या?’ मधुश्री एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें गाने तो मिले लेकिन लगातार मौके नहीं। इतनी सुरीली सिंगर न जाने अचानक कहां खो गई। उन्होंने खुद भी इस बारे में बात की थी कि आखिर उनके साथ हुआ क्या। आज हम संडे सिनेमा सीरीज में मधुश्री के बारे में ही बात करेंगे।
मधुश्री का असली नाम सुजाता भट्टाचार्य है। उनका जन्म कोलकाता में हुआ था। उनके माता-पिता अमरेंद्रनाथ और पार्वती भट्टाचार्य उनके प्रारंभिक गुरु थे। उन्होंने संगीताचार्य पंडित अमिया रंजन बंद्योपाध्याय से शास्त्रीय संगीत सीखा। मधुश्री ठुमरी और ख्याल में माहिर थीं। बाद में उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के लिए काम करना शुरू किया, जिसके जरिए उन्हें सूरीनाम में शास्त्रीय संगीत पढ़ाने का मौका मिला।
मधुश्री ने अपने संगीत को सीडी में रिकॉर्ड किया और संगीत जगत के कुछ जाने-माने लोगों को भेजना शुरू कर दिया। सीडी जावेद अख्तर तक पहुंची। जावेद अख्तर की सिफारिश पर उन्होंने राजेश रोशन की फिल्म ‘मोक्ष’ से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने ‘युवा’, ‘आयिता एझुथु’, ‘कल हो ना हो’ और ‘कुछ ना कहो’ जैसी फिल्मों में गाने गाए। ए. आर. रहमान के लिए भी उन्होंने कई सारे गाने गाए जिनमें ‘तू बिन बताए’, ‘इन लम्हों के दामन में’, ‘हम हैं इस पल यहां’ हैं। एक वक्त ऐसा भी आया जब कहा जाने लगा कि वो एआर रहमान की सिंगर हैं।
उन्होंने एआर रहमान की फिल्म ‘तहजीब’ में तीन गाने गाए, जिनमें उनका नाम सुजाता भट्टाचार्य के रूप में दर्ज है। मधुश्री को फिल्म ‘युवा’ (2004) के गाने ‘कभी नीम नीम’ के लिए जाना जाता है, जिसके लिए उन्हें बेस्ट फीमेल सिंगर का सोनी स्टारडस्ट अवॉर्ड मिला। उन्होंने एआर रहमान की ‘जोधा अकबर’ का गाना ‘इन लम्हों के दामन में’ और ‘बाहुबली 2 – द कंक्लूजन का ‘सोजा जरा’ भी गाया। उन्होंने लायंस गोल्ड अवार्ड के 20वे संस्करण में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया था।
फिर ऐसा क्या हुआ कि ये सिंगर अचानक गायब हो गईं। मधुश्री ने कहा था कि उन्हें यहां इंडस्ट्री में अपने पूरे करियर के दौरान बहुत अन्याय और भेदभाव का सामना करना पड़ा है। सारे स्टूडियो में ये बात फैलाई जाती थी कि मधुश्री तो बॉम्बे में ही नहीं है वो तो साउथ में रहती हैं। मेरे खिलाफ बहुत सारी साजिशें की गईं। ये सुनिश्चित करने के लिए कि मेरी आवाज लोगों तक न पहुंचे, हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। यहां तक कि शो में भी हटा दिया गया था।
वे कहते थे, ‘अगर ये जाएगी, तो मैं नहीं हूं इस शो में।’ जब भी मुझे रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया जाता, आखिरी मिनट में उसे कैंसिल कर दिया जाता था। म्यूजिक इंडस्ट्री में गुटबाजी और बेहद खराब राजनीति होती है। मधुश्री ने कहा था, ‘कभी-कभी, गाने की मिक्सिंग के दौरान वे मेरी आवाज को पूरी तरह दबा देते थे। लेकिन मैं ईश्वर की आभारी हूं और एआर रहमान जी की भी बहुत आभारी हूं जिन्होंने मुझे इतने सारे सुपरहिट गाने दिए। मेरे लिए मेरे फैंस और जनता ही मेरे भगवान हैं।’
दो साल पहले आया था आखिरी हिंदी गाना
साल 2001 से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मधुश्री ने आखिरी हिंदी गाना 2024 में गाया है, जो ‘गुड मॉर्निंग सनशाइन’ फिल्म का ‘हर करवटे’ गाना है। इसके अलावा, वो तमिल, तेलुगू और बंगाली गाने अभी भी गाती हैं, लेकिन बॉलीवुड से लगभग दूरी ही बना ली है।
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