‘गुरुघंटाल चोर’, मंदिरों से मूर्ति नहीं बल्कि उड़ा ले जाते थे घंटी
साहिबगंज (झारखंड)। जिले में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजमहल थाना क्षेत्र में मंदिरों से घंटी चोरी की घटना का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय, साहिबगंज की ओर से रविवार, को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बीते 22 अक्टूबर को राजमहल थाना क्षेत्र के खुटहरी स्थित बजरंगबली एवं शिव मंदिर से घंटी चोरी होने की शिकायत प्राप्त हुई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए राजमहल थाना में कांड संख्या 374/2026, दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) एवं 305(D) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
मंदिरों में चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह के निर्देश पर राजमहल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों एवं गुप्त सूचना के आधार पर जांच तेज की। इसी क्रम में 25 अक्टूबर को तालझारी के करण शर्मा उर्फ प्रसाद शर्मा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान करण शर्मा ने चोरी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए अपने सहयोगी साहेब शेख का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साहेब शेख को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार करण शर्मा ने पूछताछ में राजमहल थाना क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों से घंटी चोरी करने की बात स्वीकार की है। इनमें रेवले स्टेशन स्थित हनुमान मंदिर, ग्राम दरला स्थित हनुमान मंदिर, बोरियो बाजार स्थित हनुमान मंदिर, राजमहल थाना क्षेत्र के कसवा स्थित सीताराम मंदिर, खुटहरी स्थित हनुमान एवं शिव मंदिर तथा नीलकोठी स्थित हनुमान मंदिर शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने इन धार्मिक स्थलों से घंटियां चोरी करने की बात स्वीकार की है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 2.5 किलोग्राम वजन की पीतल की एक घंटी बरामद की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण शर्मा, उम्र 19 वर्ष, पिता भानु प्रसाद शर्मा, निवासी तालझारी तथा साहेब शेख, उम्र 32 वर्ष, पिता स्वर्गीय अमीर शेख, निवासी लक्खीपुर, थाना राजमहल, जिला साहिबगंज के रूप में हुई है। उन्हें पता था कि मूर्ति चुराने में ज्यादा रिस्क है। लेकिन पीतल की घंटी चुराने में खतरा भी ज्यादा नहीं है और उसे खपाना भी आसान है। इसीलिए उन्होंने मंदिरों की घंटियों को निशाना बनाया।
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