प्रोटीन-प्रोटीन-प्रोटीन, आखिर कितना प्रोटीन चाहिए आपके शरीर को

प्रोटीन-प्रोटीन-प्रोटीन, आखिर कितना प्रोटीन चाहिए आपके शरीर को

आजकल जिसे देखों वह प्रोटीन की बात कर रहा है। प्रोटीन पाउडर बनाने वाली कई कंपनियां अच्छा कारोबार कर रही हैं। लोग वजन घटाने और शेप में आने के लिए जिम जा रहे हैं तो वहां भी उन्हें प्रोटीन का डिब्बा पकड़ा दिया जा रहा है। प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक है। पर इसकी कितनी मात्रा किसके लिए आवश्यक है, इसपर शायद ही कोई बात करता है। यहां हम जानते हैं प्रोटीन के प्राकृतिक स्रोतों के बारे में और शरीर की जरूरतों के बारे में भी-

भारत में अपनी फिजिकल फिटनेस और प्रीवेंटिव हेल्थकेयर पर फोकस करने का ट्रेंड बढ़ रहा है। ज्यादा से ज्यादा लोग जिम जॉइन कर रहे हैं, मैराथन दौड़ रहे हैं और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इस पोजिटिव ट्रेंड के साथ हाई प्रोटीन से भरपूर फूड प्रोडक्ट्स की वैरायटी भी बढ़ रही है। जिसके ऊपर मार्केटिंग का बड़ा प्रभाव है।

कई बार हाई प्रोटीन का दावा करने वाले पैकेज्ड फूड में भी सोडियम, शुगर, सैचुरेटेड फैट्स और आर्टिफिशियल प्रीजर्वेटिव्स की अत्यधिक मात्रा होती है। हर किसी को फूड प्रोडक्ट्स के ऐसे दावे पर विश्वास करने की जगह उसके फूड लेबल पर दी जानकारी को अच्छी तरह समझना चाहिए।

यह सच है कि प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी न्यूट्रिएंट है, लेकिन प्रोटीन इनटेक को लेकर कुछ गलतफहमियां बढ़ रही हैं। मसल्स बनाने, उनकी रिकवरी, इम्यून सिस्टम के फंक्शन, स्किन व हेयर की सही हेल्थ और हॉर्मोन व एंजाइम सिंथेसिस के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन इस धारणा के पीछे कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है कि ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन लेना बेहतर साबित होता है।

भारत में खासकर बुजुर्ग, बच्चे और लोअर इकोनॉमिक बैकग्राउंड के लोगों में प्रोटीन की पूर्ति नहीं हो पाती है। लेकिन शहरों में रहने वाले लोगों के पास तो प्रोटीन से भरपूर विभिन्न फूड सोर्स उपलब्ध हैं। असली समस्या प्रोटीन की कमी नहीं है, बल्कि फूड और अन्य फैक्टर का असंतुलन है। हमें ज्यादा प्रोटीन की जगह बेहतर क्वालिटी के न्यूट्रिशन की तरफ ध्यान देना चाहिए।

आपकी मसल्स की ग्रोथ कई सारी बातों पर निर्भर करती है, जैसे रेजिस्टेंस एक्सरसाइज, सही कैलोरी इनटेक, पर्याप्त नींद और डाइट बैलेंस। इसी तरह वेट लॉस के लिए भी प्रोटीन के अलावा कैलोरी इनटेक, एक्सरसाइज, स्ट्रेस लेवल और मेटाबॉलिज्म का सही होना आवश्यक है। पोषक तत्वों में इस असंतुलित फोकस की वजह से लोगों का ध्यान डाइट के अन्य जरूरी तत्वों पर कम जाता है, जैसे फाइबर, गुड फैट, फल, सब्जियां और साबुत अनाज।

भारतीय खाने में प्रोटीन के बेहतर सोर्स
भारतीय पारंपरिक खाने में प्रोटीन के काफी बढ़िया स्त्रोत हैं, जैसे दाल, छोले, राजमा, सोया प्रोडक्ट्स, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन, नट्स और सीड्स। दाल के साथ चावल, चने के साथ रोटी आदि सीरियल्स और पल्सेस का बढ़िया मिश्रण करने पर आपको हाई क्वालिटी प्रोटीन के साथ फाइबर और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिल जाते हैं।

#Protein_Mania

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