पिकनिक और पर्यटन का आकर्षण बना गौरेला का “ठाड़पथरा”
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जीपीएम जिले का ठाड़पथरा, अपने नाम के अनुरूप खड़ी चट्टानों, घने जंगलों और अमरकंटक पहाड़ी से निकलने वाली धाराओं के लिए मशहूर एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहाँ बैगा जनजाति के लोग रहते हैं, और यहाँ मिट्टी के घर भी बने हैं, जो जंगल ट्रैकिंग, बोटिंग और स्थानीय संस्कृति का अनुभव कराते हैं, यह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक शांत जगह है।

चारों ओर हरियाली, कई जलधाराएँ और घने जंगल से घिरा यह स्थल पर्यटकों को खूब लुभाता है। ‘ठाड़’ का मतलब (खड़ा) और पथरा अर्थात पत्थर के कारण इसका नाम ठाड़पथरा पड़ा, जो यहाँ की खड़ी चट्टानों को दर्शाता है। यह बैगा जनजाति का निवास स्थल है और यहां उनके पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव किया जा सकता है. स्थानीय पर्यटन समिति द्वारा पर्यटकों के लिए मिट्टी के घर (मड हाउस) बनाए गए हैं, जहाँ रुकने की व्यवस्था है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन गतिविधियाँ को बढ़ावा देने के लिए जंगल ट्रैकिंग, बोटिंग, और स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान किये हैं।
यहाँ कैसे पहुँचें और क्या देखें : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्थित है, यहाँ तक पहुँचने के लिए स्थानीय परिवहन और जीप की सुविधा उपलब्ध है।
अन्य दर्शनीय स्थल: इसके आसपास ज्वालेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोझा जलप्रपात, राजमेरगढ़, और सोनकुण्ड पेण्ड्रा जैसे कई अन्य प्राकृतिक और धार्मिक स्थल भी हैं।
ठाड़पथरा प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय संस्कृति का अनुभव करने के लिए एक बेहतरीन स्थान है, खासकर उन लोगों के लिए जो शांत और प्राकृतिक वातावरण पसंद करते हैं।
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