रायपुर. कुरुद के चरमुड़िया गांव की स्मारिका ने कॉरपोरेट वर्ल्ड की 24 घंटे की किचकिच छोड़कर पारिवारिक व्यवसाय खेती किसानी का दामन थाम लिया है. बीई कम्प्यूटर साइंस और एमबीए तक की पढ़ाई के बाद स्मारिका ने कॉरपोरेट जगत में पैर रखा था. उसके पास अच्छा खासा 10 लाख का पैकेज भी था. छत्तीसगढ़ में खेती किसानी के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए उसने पिता का हाथ बंटाने की ठानी और नौकरी छोड़कर गांव लौट आई.












