सर्दियों का मौसम हो, अलाव अंगार का मौसम चल रहा हो और लिट्टी-चोखा (Liltti Chokha) की बात न हो – कम से कम बिहार और झारखण्ड में तो ऐसा नहीं हो सकता। गर्मागर्म लिट्टी और चोखा की बात ही और है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi ( भी इसके कायल हैं। इसका इतिहास भी उतना ही पुराना है जितना कि खुद बिहार का। इसकी जड़ें मगध तक जाती हैं।












