रेप पीड़ितों का गांव, संबंध बनाने जाना पड़ता है बाहर

रेप पीड़ितों का गांव, निषिद्ध है यहां पुरुषों का आना जाना

नई दिल्ली। अफ्रीकी देश केन्या में एक ऐसा गांव है; जहां कोई पुरुष नहीं रहता और न ही अंदर जा सकता है। बाहरी पुरुषों को भी इस गांव में कदम रखने की इजाजत नहीं है। पर इस गांव में बच्चे खूब पैदा होते हैं। संबंध बनाने के लिए गांव की महिलाओं को बाहर जाना पड़ता है। दरअसल, यह गांव रेप पीड़िताओं का है जहां पुरुषों की एंट्री बैन है।

इस गांव में चोरी-छिपे गांव में घुसने की कोशिश पर पुरुषों को गिरफ्तार किया जा सकता है। गांव में 50 परिवार हैं। सभी की मुखिया महिलाएं हैं। इस गांव में सिर्फ महिलाएं और लड़कियां ही नजर आती हैं।  गांव में भले ही पुरुषों को आने की इजाजत न हो पर यहां बेटे और बेटियां लगातार जन्म ले रहे हैं। अगर यहां की युवा महिलाओं को कोई पुरुष पसंद आता है या उन्हें अपना परिवार बढ़ाना होता है तो वे गांव से बाहर जाकर पुरुषों से संबंध बना सकती हैं। कुछ महिलाओं ने गांव के बाहर शादी भी कर रखी है तो कुछ ऐसी भी हैं जो अपना परिवार और गांव की आबादी बढ़ाने के लिए बिना शादी किए बच्चों को जन्म देती हैं।

इस गांव के लड़कों को 18 साल की उम्र पूरा करते ही घर छोड़ना पड़ता है। फिर वो कभी अपने गांव नहीं लौट सकते। गांव की इन महिलाओं ने पुरुषों को अपनी दुनिया से पूरी तरह बाहर कर रखा है। ये यहां का व्यापार, सुरक्षा और प्रशासन जैसे कामों का जिम्मा खुद संभालती हैं।

इस गांव को साल 1990 में 15 रेप पीड़िता महिलाओं ने मिलकर बसाया था। दरअसल, केन्या और ब्रिटेन में एक एग्रीमेंट हैं। जिसके तहत ब्रिटिश सैनिक केन्या आकर ट्रेनिंग लेते हैं। साल 1988 में ट्रेनिंग लेने आए कुछ ब्रिटिश सैनिकों ने स्थानीय स्कूली लड़कियों का रेप किया था। रेप की व्यथा झेलने के बाद उन लड़कियों को अपने घरवालों के ताने सुनने पड़े थे। उन्हें अपवित्र करार दिया गया। कुछ लड़कियां रेप से प्रेग्नेंट भी हुई थीं।

इन लड़कियों ने अपनी और अपने होने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘उमोजो’ गांव बसाया। इन लड़कियों को डर था कि पुराने गांव में उन्हें उनके मिश्रित नस्ल के बच्चों को हमेशा अपमान झेलना पड़ेगा। इस गांव की यंग महिलाएं बाहर के पुरुषों से संबंध तो रख सकती हैं लेकिन उन्हें गांव में आने की इजाजत नहीं होती।
रेप पीड़िताओं के बसाए इस गांव की आबादी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। अब इस गांव में विधवा, तलाकशुदा और शादी से बचने वाली लड़कियां भी आने लगी हैं। किसी भी कारण से हिंसा और अपमान झेलने वाली लड़कियों और महिलाओं का इस गांव में दिल खोलकर स्वागत किया जाता है। शर्त बस एक ही है कि उन्हें पुरुषों से किसी तरह का मेल-मिलाप नहीं रखना होगा।

घाना के फोटोग्राफर पॉल निंसन किसी तरह इस गांव में जाने में सफल रहे। उन्होंने बिना पुरुषों के अपनी दुनिया आबाद करने वाली महिलाओं की फोटो खींची। जिसके बाद दुनिया भर में इस गांव की चर्चा हो रही है।

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