20 साल बाद जांघ से फोड़ा बनकर निकली राइफल से चली गोली
फरीदाबाद। चार बच्चों की मां कविता की जांघ में एक फोड़ा हुआ। जब फोड़ा फूटा तो उसमें एक गोली निकली। जांच में पता चला कि यह सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR) की गोली (bullet) है। दिमाग पर बहुत जोर देने के बाद कविता को याद आया कि बचपन में उसकी जांघ में कुछ चुभा था। घर पर की गई मरहम पट्टी से ही वह घाव भर गया था। अब वह इस गोली को संभाल कर रखेंगी। आखिर इसे उन्होंने 20 साल तक अपने शरीर में पाला है।
दैनिक भास्कर पोर्टल में प्रकाशित खबर के अनुसार 32 वर्षीय कविता फरीदाबाद के डबुआ कॉलोनी में रहती है। 20 साल पहले कमरे के नीचे के हिस्से में गोली लगी थी। तब वह 12 साल की थी और स्कूल में पढ़ती थी। तब उसे पता ही नहीं चला कि गोली लगी है। बस एक छोटा सा जख्म हुआ था, जो कुछ दिनों बाद भर गया।
बचपन में कविता मानेसर के गांव कोटा खांडेवाला में रहती थी। एक दिन वह गांव के ही स्कूल के बाहर ग्राउंड में दूसरे बच्चों के साथ पेपर दे रही थी। तभी कमर के नीचे वाले हिस्से में कोई नुकीली चीज आकर लगी। थोड़ा खून भी निकला था। चोट लगने पर टीचरों ने घर भेज दिया। घरवालों ने तेल-हल्दी का लेप लगा दिया। धीरे-धीरे जख्म ठीक हो गया। उसके बाद मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।
दरअसल, गांव के पास में एक आर्मी ट्रेनिंग कैंप (army training camp) था। संभवतः गोली वहीं से आई थी। पर इस घटना के बाद 20 साल तक उसे कोई परेशानी नहीं हुई। उसकी शादी हुई। बच्चे भी हो गए। जीवन सुकून से चल रहा था कि कुछ दिन पहले उस जगह पर एक फोड़ा उभर आया। कविता ने लेप लगाकर पट्टी बांधी। जब फोड़ा फूटा, तो उसमें से गोली निकली। महिला अब पूरी तरह स्वस्थ है। परिवार के लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं।
गोली की स्पीड ज्यादा नहीं रही होगी
बादशाह खान सिविल अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. उपेंद्र भारद्वाज ने बताया कि ऐसा होना संभव है, क्योंकि बुलेट एक मैटेलिक ऑब्जेक्ट है। जब गोली निकलती है, तो उसमें कोई जहर नहीं होता, वह बस एक गरम लोहे का टुकड़ा होती है। कई बार, गोली शरीर के हड्डी वाले हिस्से में रुक जाती है। ऐसा गोली की रफ्तार कम होने पर होता है। हमारी कोशिकाएं गोली के चारों तरफ एक तरह की दीवार खड़ी कर देती हैं, जिससे गोली वहीं पर रुकी रहती है।
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