ताला महोत्सव में शामिल हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल
रायपुर। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बिलासपुर के ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल ताला में ताला महोत्सव के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में भाग लिया। वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक एवं अन्य गणमान्य जनों के साथ उन्होंने मनियारी नदी के पावन तट पर स्थित देवरानी-जेठानी मंदिर में भगवान रुद्रशिव की दिव्य प्रतिमा का दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की ।
श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखते हैं तथा पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि सभी अपनी परंपराओं को अपनाएं और राज्य के सांस्कृतिक स्थलों को विकसित करने में योगदान दें।
ताला महोत्सव बिलासपुर जिले के ग्राम ताला में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है। ताला महोत्सव स्थानीय लोककला, भक्ति संगीत व धार्मिक अनुष्ठानों का अनुपम संगम है, जो पर्यटन को बढ़ावा देता है।
ताला शिवनाथ और मनियारी नदी के संगम पर स्थित है। देवरानी-जेठानी मंदिरों के लिए सबसे मशहूर, ताला की खोज 1873-74 में जे.डी. वेलगर ने की थी, जो प्रसिद्ध पुरातत्वविद् अलेक्जेंडर कनिंघम के सहायक थे । इतिहासकारों ने दावा किया है कि ताला गांव 7-8 वीं शताब्दी ईस्वी की है।
ताला के पास सरगांव में धूम नाथ का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान किरारी के शिव स्मारक हैं। ताला बहुमूल्य पुरातात्विक खुदाई की भूमि है जिसने उत्कृष्ट मूर्तिकला के काम को प्रकट किया है। पुरातत्त्वविदों और इतिहासकारों को जटिल रूप से तैयार पत्थर की नक्काशी मंत्रमुग्ध करता है। खुदाई 6 वीं से 10 वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान ताला की समृद्धि का वर्णन करती हैं। हालांकि, मूर्तिकला-शैली विभिन्न राजवंशों की ओर इशारा करती है जो ताला में शासन करते थे और भगवान शिव के भक्त और शैव धर्म के प्रचारक थे। आज भी शिव भक्त विभिन्न अनुष्ठान करने और महामृत्यजय मंत्र का जप करने के लिए यहां मंदिरों को ढूंढ लेते हैं। ताला निषाद समाज द्वारा निर्मित विभिन्न मंदिरों का भी घर है, जिसमें राम-जानकी मंदिर, स्वामी पूर्णानंद महाजन मंदिर और गोशाला शामिल हैं।
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