हिरोशिमा के वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन को बन दिया रेडिएशन डिटेक्टर
1945 में इसी शहर पर अमेरिका ने गिराया था एटम बम
टोक्यो। जापान के हिरोशिमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपकरण बनाया है, जो स्मार्टफोन को रेडिएशन डिटेक्टर बना देता है। यह परमाणु या रेडियोलॉजिकल घटनाओं के बाद तुरंत असर का पता लगाने में मदद करेगा। यह सिस्टम रेडियोक्रोमिक फिल्म और स्मार्टफोन कैमरे का उपयोग करता है।
हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बमबारी 6 अगस्त 1945 की सुबह अमेरिकी वायु सेना ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम “लिटिल बॉय” गिराया था। तीन दिनों बाद अमरीका ने नागासाकी शहर पर “फ़ैट मैन” परमाणु बम गिराया। इससे भारी तबाही और जनहानि हुई थी। पर जापान ने न केवल इससे खुद को उबारा बल्कि एक महाशक्ति के रूप में उठ खड़ा हुआ। अब उसने एक ऐसी तकनीक इजाद की है जो हर हाथ में रेडिएशन डिटेक्टर थमा सकती है।
न्यूज वेबसाइट नवभारतटाइम्स.इंडियाटाइम्स ने खबर दी है कि हिरोशिमा विश्वविद्यालय के रिसर्चर ने एक ऐसा कम लागत वाला पोर्टेबल रेडिएशन डोसीमेट्री सिस्टम बनाया है, जो स्मार्टफोन को ऑन-साइट रेडिएशन डिटेक्टर में बदल देता है। सिस्टम परमाणु या रेडियोलॉजिकल घटनाओं के तुरंत बाद उसकी डोज यानी असर का पता लगाने में मदद करेगा। ये सिस्टम ऐसे समय में आया है, जब जापान बढ़ती ऊर्जा मांगों और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को फिर से अपना रहा है।
रेडिएशन मेजरमेंट्स नाम के एक जर्नल में पोर्टेबल रेडिएशन डोसीमेट्री सिस्टम की डिटेल दी गई है। सिस्टम बनाने के लिए रेडियोक्रोमिक फिल्म के एक छोटे से टुकड़े को फोल्डेबल, बैटरी से चलने वाले स्कैनर और स्मार्टफोन कैमरे के साथ जोड़ता है। इसे इसलिए डिजाइन किया गया है ताकि यह ऐसी स्थिति में भी तुरंत नतीजे दे सके, जहां ट्रेडिशनल लैब बेस्ड तरीके बहुत धीमे, महंगे या पहुंच से बाहर हो सकते हैं।
#SmartPhoneRadiationDetector #HiroshimaScientists












