कृषि एवं पर्यावरणीय विकास में सूक्ष्म जीव विज्ञान की अहम भूमिका – डाॅ. अजय सिंह
दुर्ग। कृषि एवं पर्यावरणीय विकास में सूक्ष्म जीव विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है – सूक्ष्म जीव विज्ञान के विद्यार्थियों को प्रायोगिक षिक्षण एवं वैज्ञानिक जागरूकता के प्रति प्रतिबध्दता होनी चाहिए। ये उद्गार शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह ने आज व्यक्त किये। डाॅ. सिंह आज महाविद्यालय की माइक्रोबायलाॅजी एसोसिएषन माइक्रोबिया के तत्वावधान में आयोजित श्माइक्रोबियल वन्डर्स-लाइफ बियाॅड द नैकेट आईश् थीम पर जीवित सूक्ष्म जीव के शुध्द कल्चर की प्रदर्षिनी का उद्घाटन कर रहे थे। यह जानकारी देते हुए माइक्रोबायलाॅजी विभाग की प्रमुख डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी ने बताया कि आज आयोजित इस प्रदर्षिनी में कुल 28 सूक्ष्मजीवों जिसमें फनजाई, जीवाणु के लल्चर, एनाजाइम एवं नैनो पार्टिकल के बिड्स, बायो फर्टिलाइजर तथा आॅस्टर मषरूम के तैयार स्पाॅज भी प्रदर्षित किए गए। इन सभी कल्चर्स का संवर्धन माइक्रोबायलाॅजी विभाग के स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया।
माइक्रोबायलाॅजी विभाग की सहायक प्राध्यापक डाॅ. रेखा गुप्ता एवं श्रीमती नीतू दास ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि इस प्रदर्षिनी में विद्यार्थियों को सूक्ष्मजीवों के बारे में आधारभूत जानकारी के साथ-साथ उनकी उपयोगिता एवं माइक्रोबायलाॅजी विषय के महत्व की जानकारी दी गयी। इस प्रदर्षिनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए उपयोगी उत्पादों का प्रदर्षन भी किया गया। इस दौरान नवाचार पूर्ण प्रस्तुति एवं शैक्षणिक महत्व की उपस्थित प्राचार्य एवं विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने सराहना की। प्रदर्षिनी के दौरान विद्यार्थियों ने अंगुर से तथा गन्ने से अल्कोहल के उत्पादन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह, डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी, डाॅ. नीतू दास, डाॅ. रेखा गुप्ता, वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव, डाॅ. एस.डी. देषमुख, डाॅ. जी.एस. ठाकुर, डाॅ. सुनीता बी. मैथ्यू, डाॅ. अनुपमा कष्यप, डाॅ. रचिता श्रीवास्तव, डाॅ. विजय लक्ष्मी नायडू, डाॅ. सतीष कुमार सेन, सुश्री मृणालिनी सोनी, सुश्री के. यशोदा शामिल थे।
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