पब्लिक ट्रांसपोर्ट : 300 में बची 30 बसें, ई-बसों की तैयारी अब तक अधूरी
रायपुर। खाड़ी की स्थिति के चलते ईंधन संकट के दौर से गुजर ही दुनिया में बेशक पीएम सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दे रहो हैं, पर सार्वजनिक परिवहन हैं कहां। राजधानी रायपुर की ही बात करें तो 300 सिटी बसों में से केवल 30 अभी चल रही हैं और उनकी भी हालत खराब है। राज्य के ई-बसें स्वीकृत हुई पड़ी हैं पर उनके लिए अवसंरचना ही तैयार नहीं हो पाई। जबकि छत्तीसगढ़ के साथ ही जिन अन्य राज्यों को बसों की ई-बसों की सौगात मिली थी, वहां ये सुविधा शुरू भी हो चुकी है।
मार्च 2024 में रायपुर में 100 ई-बस चलाने के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृति मिली। इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने का काम शुरू हो गया। इसे पूरा होने में अभी कम से कम एक साल का इंतजार और करना होगा। जब तक इन बसों के रखरखाव और चार्जिंग की व्यवस्था नहीं बन जाती, इन बसों को सड़कों पर नहीं उतारा जा सकता।

दूसरी ओर रायपुर से ठीक एक महीने पहले फरवरी 2024 में नागपुर शहर को 150 ई बसों के लिए स्वीकृति मिली थी। वहां तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप हुआ और आज 150 में से 50 ई-बसे वहां चल रही हैं। इसी तरह गुवाहाटी, भावनगर और चंडीगढ़ में भी केंद्रीय योजना के तहत ई-बसों का परिचालन इसी साल फरवरी में शुरू हो गया है।
रायपुर में ई-बस के लिए डिपो और चार्जिंग स्टेशन जैसी प्रमुख सुविधाएं विकसित होने के बाद ही ई-बसें मिलेंगी। फिर रूट और किराया तय करके इसे संचालित किया जा सकता है। इस तरह ई-बस सेवाओं के लिए करीब एक साल का और इंतजार करना होगा।
केन्द्र से मिला फंड
कुल इंफ्रास्ट्रक्चर बजट: 27.23 करोड़
केंद्रीय अंशदान डिपो निर्माण – 8.60 करोड़
राज्य अंशदान – 5.73 करोड़
पावर इंफ्रास्ट्रक्चर – केंद्र का 12.90 करोड़
कितनी हुई तैयारी
बताया जाता है कि डिपो के लिए जमीन निर्धारण और आवंटन में देरी हुई है। अभी जरवाय में 2 हेक्टेयर जमीन पर काम चल रहा है। जमीन आवंटन के बाद तेजी से सिविल और इलेक्ट्रिक संसाधन विकसित करने का काम चल रहा है। चार्जिंग स्टेशन के लिए सीएसपीडीसीएल नोडल है और सरोना से जरवाय तक लाइन खींचने का काम कर रहा है।
हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द डिपो तैयार कर ई-बस लें और सभी संभावित रूटों में संचालित करें, ताकि पर्यावरण के साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कल्चर शहर में और विकसित हो।
जरवाय में 2 हेक्टेयर जमीन पर डिपो निर्माण का काम चल रहा है। अभी यहां बाउंड्रीवाल, प्लिंथ लेवल का काम, पानी टंकी निर्माण सहित इवैक्यूएशन सेंटर का काम चल रहा है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सीएसपीडीसीएल सरोना से जरवाय डिपो तक 30 केवी का बिजली लाइन खींचकर देगा। इसका काम भी अभी शुरुआती दौर में ही है।
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