बुद्ध से 200 साल पहले भी था छत्तीसगढ़, मिले वैज्ञानिक सबूत
रायपुर। छत्तीसगढ़ बुद्ध से भी 200 साल पहले से अस्तित्व में है। इसके वैज्ञानिक सबूत मिले हैं। रायपुर के रीवागढ़ क्षेत्र से प्राप्त चारकोल (लकड़ी का कोयला) के रेडियो कार्बन डेटिंग परीक्षण से छत्तीसगढ़ के इतिहास के नई परतें खुल गई हैं। इसमें वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं कि ये स्थल बुद्ध काल से 200 वर्ष पहले यानी लौह युग का है। इसने साबित किया है कि छत्तीसगढ़ में मानव सभ्यता व सांस्कृतिक विकास अधिक प्राचीन है।
इससे पहले 2014 में बस्तर के कई जगहों से हमने पाषाण के नमूनों का संग्रह किया गया था। इनके अध्ययन व केटेगरी बनाने पर पता चला है कि यहां तीस से 70 हजार पहले एक मानव सभ्यता विकसित हुई है। हालांकि इसकी कार्बन डेटिंग अभी नहीं हुई है। रीवागढ़ वह पहला स्थान है जिसकी कार्बन डेटिंग अमेरिका में की गई।
पुरातत्व अभिलेखागार व संग्रहालय संचालनालय छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञों के अनुसार रायपुर से करीब 35 किमी दूर रीवागढ़ से खुदाई में प्राप्त 3 चारकोल के नमूनों को रेडियो कार्बन डेटिंग के लिए अमेरिका भेजा गया था। वहां से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक नमूने की कालावधि 800 ईसा पूर्व की है।
यहां कुषाण कालीन (पहली से तीसरी शताब्दी तक की अवधि) के 300 से अधिक तांबों के सिक्कों के साथ जमीन के 20 फीट नीचे बौद्धधर्म के स्तूप मिले थे। इसके अलावा शिव मघ, विजय मघ, यम मघ जैसे सामान भी मिल रहे हैं। इस पर एक ओर हाथी बना है और दूसरी ओर ब्राह्मणी लिखा है।
रीवा में वर्ष 2018 में उत्खनन की शुरुआत में ही कुषाण काल, कलचुरि और पांडुवंश के पुराने धरोहर मिलने लगे थे। अब नए राजवंश मघवंशी होने के प्रमाण मिल रहे हैं। अर्थात यह उत्खनन स्थल लगभग छठवीं सदी के प्रशासनिक और व्यापारिक स्थल के रूप में विकसित है।
ये वह काल है, जब मानव ने पत्थर व तांबे कांसे के औजारों की जगह लोहे के औजार बनाने शुरू किया। गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। इस तरह बुद्ध काल से 200 साल पूर्व का वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं।
पुरातत्व विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में रीवागढ़ क्षेत्र में और विस्तृत खुदाई कराई जाएगी। वैसे पुरातत्व संचालनालय से अब तक ताला, गढ़धनौरा, भोंगापाल, शिष्यदेवरी, सिरपुर, महेशपुर, पचराही, तरीघाट, डमरू, मदकुद्वीप, राजिम, देवरी, जमरांव और रीवागढ़ में खुदाई कराई जा चुकी है।
अफसरों का कहना है कि रीवागढ़ से पंचमार्ग वाले चांदी के सिक्के मिले, इन्हें आहत सिक्के भी कहा जाता है। इसी तरह कुषाण, मद्य, स्थानीय, सरभपुरीय, कल्चुरी आदि के सिक्के मिले। यह यहां की आर्थिक स्थिति को बताते हैं। सिक्के 3 शताब्दी ई.पूर्व से लगभग 11वीं-12वीं शताब्दी ईसवी तक के हैं। यहां से प्राप्त सिक्कों का 1200 साल पुराना इतिहास है।
क्या है रेडियो कार्बन डेटिंग : यह वैज्ञानिक पद्धति है। जिससे किसी पुरातात्विक स्थल से मिले जैविक अवशेषों की वास्तविक उम्र का पता लगाते हैं। इस तकनीक में कार्बन-14 नामक रेडियोधर्मी तत्व के क्षय की गणना की जाती है। जीवित अवस्था में सभी पौधे व जीव कार्बन-14 ग्रहण करते हैं, पर मृत्यु के बाद इसका क्षय शुरू हो जाता है।
नतीजे उत्साहजनक, घोषणा जल्द करेंगे
रीवागढ़ के उत्खनन की रेडियो कार्बन डेटिंग कराई गई थी। अधिकारियों से पता चला है कि इसके नतीजे उत्साहजनक हैं। मैं खुद साइट पर जाऊंगा। इसके बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।
– राजेश अग्रवाल, संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़
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