मृत व्यक्ति के शुक्राणु पर किसका हक? हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

मृत व्यक्ति के शुक्राणु पर किसका हक? हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें एक निजी अस्पताल को अविवाहित मृत व्यक्ति के ‘फ्रीज’ शुक्राणु उसके माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया गया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र की याचिका पर मृतक के माता-पिता को नोटिस जारी किया है।

केंद्र ने सिंगल जज के 2024 के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि यदि शुक्राणु या अंडाणु के मालिक की सहमति स्पष्ट रूप से साबित हो जाए, तो मृत्युपरांत प्रजनन के लिए इनके इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है। बेंच ने इस याचिका की आगे की सुनवाई के लिए 27 फरवरी 2026 की तारीख तय की है।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि सिंगल जज का आदेश सहायक प्रजनन और सरोगेसी कानून के मौजूदा प्रावधानों के खिलाफ है। वकील ने बताया कि कानून में दादा-दादी को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सरोगेसी (Surrogacy) के मकसद से इच्छुक दंपति बनने की अनुमति नहीं देता।

उन्होंने यह भी कहा कि सिंगल जज के निर्देश के बावजूद मृतक का फ्रीज किया गया शुक्राणु अभी तक माता-पिता को नहीं सौंपा गया है। इस पर दायर अवमानना याचिका अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है। अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा कि अपील दाखिल करने में एक साल से अधिक का विलंब क्यों हुआ।

सिंगल जज की बेंच ने 4 अक्टूबर 2024 को सर गंगा राम अस्पताल को निर्देश दिया था कि मृतक का फ्रीज शुक्राणु उसके माता-पिता को सौंपा जाए। न्यायाधीश ने यह आदेश माता-पिता की याचिका पर दिया था और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भी यह विचार करने के लिए कहा था कि मृत्युपरांत प्रजनन से जुड़े मामलों पर कानून, अधिनियम या दिशा-निर्देश की आवश्यकता है या नहीं।

क्या है मामला

याचिकाकर्ताओं के बेटे ने 2020 में कैंसर के इलाज से पहले स्पर्म का सैंपल फ्रीज करवा लिया था। डॉक्टरों ने बताया था कि कीमोथेरेपी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जून 2020 में उसने अस्पताल की आईवीएफ लेबोरेटरी में अपने स्पर्म सुरक्षित रखने का फैसला किया। सिंगल जज ने अपने फैसले में कहा था कि स्पर्म का सैंपल संपत्ति की तरह है और मृत व्यक्ति के मामले में यह मानव अंग या जैविक सामग्री का हिस्सा माना जा सकता है। न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता के बेटे ने स्पष्ट रूप से सहमति दी थी कि वह अपने प्रजनन क्षमता बचाने के लिए स्पर्म फ्रीज करने के लिए तैयार है।

#FrozenSpermRights

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