खैरागढ़ में मिली अवधि में लिखी पांडुलिपी, घोड़ों पर मिली विशिष्ट जानकारी

खैरागढ़ में मिली अवधि में लिखी पांडुलिपी, घोड़ों पर मिली विशिष्ट जानकारी

खैरागढ़। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की महत्वपूर्ण पहल “ज्ञान भारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” के अंतर्गत जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य लगातार जारी है। कलेक्टर श्री इंद्रजीत चंद्रावल के मार्गदर्शन में जिले में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर ज्ञान भारतम ऐप के माध्यम से उनका पंजीयन किया जा रहा है।

इसी क्रम में आज ठाकुरपारा खैरागढ़ निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक श्री गोपाल दीक्षित के पास सुरक्षित दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपि का अवलोकन कलेक्ट्रेट परिसर में कलेक्टर श्री इंद्रजीत चंद्रावल द्वारा किया गया। श्री दीक्षित ने जानकारी दी कि यह हस्तलिखित पांडुलिपि अवधी भाषा में लिखी गई है, जिसमें घोड़ों से संबंधित विस्तृत जानकारी संकलित है। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में घोड़े यातायात एवं आवागमन का प्रमुख साधन हुआ करते थे, इसलिए यह ग्रंथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस दौरान श्री दीक्षित द्वारा सन 1925 ईस्वी के ब्रिटिशकालीन स्टाफ एवं तत्कालीन दीवान के हस्तलिखित पत्र भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखकर अधिकारियों ने इसे ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए सराहना की।

कलेक्टर श्री चंद्रावल ने कहा कि जिले में संरक्षित ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इनके संरक्षण एवं डिजिटलीकरण से आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री प्रेम कुमार पटेल, अपर कलेक्टर श्री सुरेंद्र ठाकुर, अनुविभागीय अधिकारी श्री टांकेश्वर प्रसाद साहू, प्रभारी प्राचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार साखेद, प्रापपादक मंगलानंद झा सहित श्री गोपाल दीक्षित के पारिवारिक सदस्य उपस्थित रहे।

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