25 मार्च को खुलेगा महाप्रभु जगन्नाथ का खजाना, लगाएंगे हिसाब
पुरी। महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गिनती और लिस्ट बनाने की प्रक्रिया 25 मार्च को दोपहर 12.12 बजे से 1.45 बजे शुभ मुहूर्त में प्रारंभ होगी। ‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। पिछली बार यह गणना 1978 में हुई थी। उस समय यहां 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषणों की सूची बनाई गई थी। गिनती 72 दिन चली थी।
रत्न भंडार काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक दो वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करेगा जबकि राष्ट्रीयकृत बैंक पंजीकृत सुनार उपलब्ध कराएंगे।
मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि राज्य सरकार दो रत्नविज्ञानी भी उपलब्ध कराएगी, जो आभूषणों में लगे बेशकीमती रत्नों की पहचान करेंगे। बाहरी रत्न भंडार में भगवान के दैनिक उपयोग के आभूषण रखे जाते हैं।
राज्य सरकार ने गहनों की गिनती के लिए एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय पैनल प्रक्रिया की निगरानी करेगा। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के लिए अलग-अलग बॉक्स होंगे। 10 लोग आभूषणों को बॉक्स में रखेंगे। मजिस्ट्रेट खजाने से रोज रत्न भंडार की चाभी लेकर आएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे।
ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालांकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के चेंबर तक पहुंची तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है।
तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं। इनमें कीमती पत्थर लगे हैं। साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं।
46 साल पहले 18 जुलाई को महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार में रखा खजाना निकाला गया था। इस काम के लिए राज्य सरकार की तरफ से गठित हाई कमेटी के 11 सदस्य गुरुवार सुबह 9:15 बजे भीतरी भंडार के अंदर गए थे। उन्हें यहां मोटे कांच की तीन और लोहे की एक (6.50 फुट ऊंची, 4 फुट चौड़ी) अलमारियां मिलीं थीं। इसके अलावा 3 फीट ऊंचे और 4 फीट चौड़े लकड़ी के दो संदूक और एक लोहे का संदूक था। सभी के अंदर कई सारे बॉक्स रखे हुए थे, जिनमें सोना था।
टीम के एक सदस्य ने एक बॉक्स को खोलकर देखा गया था। इसके बाद अलमारी और संदूकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो इतने भारी थे कि जगह से हिले तक नहीं। फिर तय हुआ कि सभी बॉक्स से खजाने को निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में शिफ्ट किया जाए। टीम को इस काम को करने में 7 घंटे लग गए थे।
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