मीडियास्टिनोस्कोप से निकाला महिला के सीने में जमा मवाद
भिलाई। बस्तर अंचल से एक लगभग 32 वर्षीय महिला गर्दन में तेज दर्द की शिकायत लेकर हाईटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल आई थी। सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ नचिकेत दीक्षित ने उनकी जांच करने के बाद पाया कि उनकी गर्दन से लेकर छाती की तरफ का हिस्सा कठोर हो गया है। उन्होंने मरीज को ईएनटी विशेषज्ञ डॉ अपूर्व वर्मा को रिफर कर दिया। दरअसल महिला के सीने में मवाद फैल रहा था।
डॉ अपूर्व वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद महिला का सीटी स्कैन करवाया गया। रेडियोलॉजिस्ट डॉ जेनी व्यास की रिपोर्ट के अनुसार सीने के एक बड़े हिस्से में मवाद फैला हुआ था। मरीज की तत्काल सर्जरी प्लान की गई। एनेस्थेटिस्ट डॉ नरेश देशमुख तथा छाती रोग विशेषज्ञ डॉ प्रतीक कौशिक के साथ टीम बनाई। महिला के कॉलर बोन (हंसुली की हड्डी) के पास एक छोटा चीरा लगाकर पहले मिनिमल इनवेसिव तकनीक से मवाद की सफाई शुरू की गई। मवाद नीचे फेफड़ों के बीच के हिस्से तक फैला था।
डॉ वर्मा ने बताया कि इसके बाद मीडियास्टिनोस्कोप के जरिए फेफड़ों के बीच के हिस्से (मीडियास्टिनम) की जाँच की गई और मवाद को निकाला गया। मीडियास्टिनोस्कोप एक पतली सी नली होती है जिसमें प्रकाश और कैमरे की व्यवस्था होती है।
मीडियास्टिस्कोपी से लिम्फ नोड्स की जांच की जा सकती है। आसपास के ऊतकों के नमूने लेकर उन्हें संभावित कैंसर की जांच के लिए भेजा जा सकता है।
डॉ अपूर्व ने बताया कि सर्जरी के बाद महिला की तकलीफ जाती रही। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि तीव्र मीडियास्टिनाइटिस आमतौर पर आहारनली में छेद होने, छाती की सर्जरी के बाद संक्रमण फैलने, या गले/गर्दन के संक्रमण के नीचे उतरने के कारण होती है। यह एक विरल बीमारी है इलाज में विलंब होने पर घातक भी साबित हो सकती है।

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