72 की उम्र में जूली को भूलकर मटुकनाथ ने ढूढ ली नई प्रेमिका!
पटना। बिहार के लव गुरु का नाम तो आपने सुना ही होगा। पटना यूनिवर्सिटी के रिटायर प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी को अपनी ही स्टूडेंट रही जूली से प्यार हो गया था। दोनों खूब चर्चा में भी थे। पर बाद में जूली उन्हें छोड़कर विदेश चली गई। खबर है कि मटुकनाथ को फिर से किसी से प्यार हो गया है। मटुकनाथ फिलहाल 72 वर्ष के हैं पर दिल उनका अब भी उतना ही जवान है।
साल 2006 में मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी के गलियारों से लेकर देशभर के न्यूज चैनलों पर छाए हुए थे। एक अधेड़ उम्र के प्रोफेसर और उनकी आधी उम्र की छात्रा जूली की प्रेम कहानी ने सबको आह्लादित किया था। वक्त बदला, चेहरे बदले, और अब 72 साल की उम्र में बिहार के वही ‘लव गुरु’ यानी मटुकनाथ चौधरी एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनकी जिंदगी में जूली नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी ‘जानू’ की एंट्री हुई है।
दरअसल, मटुकनाथ चौधरी ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में ‘लव गुरु’ ने रहस्यमयी महिला के साथ हुए संवाद का जिक्र किया है, जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है। उन्होंने लिखा कि वह महिला उनसे प्यार करती है, लेकिन उसके प्यार की शर्त बड़ी अनोखी है। वह चाहती है कि मटुकनाथ उसकी रचनाओं को पढ़ें और उन पर विस्तृत टिप्पणियां करें।
लव गुरु ने इस पर सवाल उठाया कि क्या यह प्रेम है या कोई ड्यूटी? उन्होंने लिखा, ‘मैं सोचने लगा हूं कि यह प्रेम है या ड्यूटी? मैं तो समझता हूं कि प्रेम के बदले प्रेम होना चाहिए। मैंने एक दिन उनसे कह दिया कि मुझसे यह सब नहीं होगा। प्यार में कोई सौदा नहीं होता।’
क्या इतने भर के लायक मैं रह गया हूं? क्या मुझमें इसके अलावा प्रेम की कोई अन्य योग्यता नहीं है? क्या मैं अन्य तरीके से तुम्हें प्रसन्न नहीं रख सकता?
लेकिन इसके जवाब में उस महिला ने जो कहा, उसने प्रोफेसर साहब के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया। महिला ने दो टूक जवाब दिया- ‘आप किस लायक हैं कि मैं आपको प्यार के बदले प्यार दूं? आप जिस लायक हैं, वही काम आपसे लूंगी न! आप पढ़ सकते हैं, लिख सकते हैं, वही कीजिए।’
मटुकनाथ जब चिढ़ गए, तो महिला ने यहां तक कह दिया कि- ‘तुम केवल प्यास जगा सकते हो, बुझा नहीं सकते।’
महिला के कड़वे बोल सुनकर मटुकनाथ हार मान चुके थे। उन्होंने मन बना लिया था कि अब वह प्यार नहीं करेंगे। वह अपनी पुरानी यादों और दर्द की दवा तलाश ही रहे थे कि तभी उनके फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ वही महिला थी। उसने प्यार से पूछा- ‘मुझसे नाराज हो जानू?’
मटुकनाथ लिखते हैं कि इस ‘जानू’ शब्द ने जादू जैसा काम किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में भावनाओं को उंडेलते हुए लिखा- ‘हाय, इस ‘जानू’ शब्द को सुनते ही जान में जान आ गई। मुरझा रहा पौधा फोरन जल पड़ते ही हरा हो गया।’ प्रोफेसर साहब ने तुरंत हथियार डाल दिए और वादा कर लिया कि अब वह उनकी रचनाए भी पढ़ेंगे और टिप्पणियां भी करेंगे, ताकि इसी बहाने उनसे जुड़ाव बना रहे।
नाराज क्यों होऊंगा ? तुझपे नाराज होऊंगा तो प्रसन्न किस पर होऊंगा ? आगे से तुम्हारी रचनाएं पढ़ा करूंगा और और उन पर टिप्पणियां भी किया करूंगा।
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