नोनी सहायता : शिल्पकार की बेटी ऐश्वर्या के खाते में पहुंचे 20 हजार
रायपुर। पत्थरों को तराशकर खूबसूरत मूर्तियों का आकार देने वाले एक पिता की सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि उसकी बेटियां पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवारें। अपनी कला से दूसरों की आस्था और कल्पनाओं को साकार करने वाला यह पिता अब अपनी बेटियों के सपनों को भी नई उड़ान देना चाहता है। धमतरी जिले के ग्राम लोहरसी निवासी मूर्तिकार श्री मनोज कुमार गंगबेर की इसी उम्मीद को छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना ने नया संबल दिया है। योजना के तहत उनकी बेटी ऐश्वर्या को 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने से परिवार में खुशी और आत्मविश्वास का नया संचार हुआ है।
मनोज कुमार गंगबेर अपनी मेहनत और कलात्मक हुनर से पत्थरों को आकर्षक मूर्तियों में ढालते हैं। मूर्तिकारी ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। काम के ऑर्डर के अनुसार होने वाली आमदनी से घर की जरूरतें पूरी करने के साथ दो बेटियों की शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने देने का संकल्प लिया। उनकी इच्छा थी कि बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें और जीवन में आगे बढ़ें।
इसी दौरान श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक गंगबेर को मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना की जानकारी मिली। उन्होंने बेटी ऐश्वर्या के लिए आवेदन किया। आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना के अंतर्गत 20 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे ऐश्वर्या के बैंक खाते में अंतरित की गई।
बेटी के खाते में सहायता राशि पहुंचने से परिवार की आर्थिक चिंता कुछ कम हुई है। इस राशि से ऐश्वर्या की शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। श्री गंगबेर के लिए यह सहयोग इसलिए भी विशेष है, क्योंकि अब वे अपनी आजीविका के साथ बेटी की पढ़ाई को लेकर अधिक आश्वस्त हैं। जिस पिता के हाथ पत्थरों को सुंदर आकार देते हैं, उन्हीं हाथों की मेहनत से संजोए गए बेटी के सपनों को अब शासन की योजना का सहारा मिला है।
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